बिलसंडा। नगर पंचायत क्षेत्र में चल रहे नाला निर्माण कार्य की मिट्टी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही मिट्टी और कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने पर नगर पंचायत चेयरमैन डीके गुप्ता अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए और व्यापारियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए दबंगई दिखाई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाला निर्माण कार्य के दौरान कुछ व्यापारियों ने निर्माण सामग्री और मिट्टी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। व्यापारियों का कहना है कि जनता के पैसे से हो रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना उनका अधिकार है। आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया और मौके पर पहुंचे चेयरमैन व उनके समर्थकों के साथ तीखी नोकझोंक हुई।वायरल वीडियो में मौके पर काफी संख्या में लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। वीडियो में बहस और हंगामे के दृश्य सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई गई परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हो रहा है तो जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन सवाल उठाने वालों को डराने या दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
व्यापारियों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की जांच कराए जाने, निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की समीक्षा कराने तथा वायरल वीडियो की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं नगर पंचायत पक्ष की ओर से इस मामले में क्या सफाई दी जाती है, इस पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।
घटना के बाद बिलसंडा का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों को लेकर उठ रहे विवादों का समाधान संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से होना चाहिए, ताकि जनता के बीच किसी प्रकार का भ्रम न फैले।फिलहाल वायरल वीडियो और व्यापारियों के आरोपों ने नगर पंचायत प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जबकि लोग पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
