लखनऊ। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित सेठी ग्रैंड होटल में जीएसटी विभाग एवं ट्रांसपोर्ट व्यापारियों के मध्य आयोजित संवाद कार्यक्रम में परिवहन उद्योग से जुड़ी विभिन्न समस्याओं एवं जीएसटी विभाग द्वारा प्रस्तावित नए प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में ट्रांसपोर्ट व्यापारियों ने अपनी समस्याओं, सुझावों एवं आपत्तियों को प्रमुखता से रखते हुए प्रस्तावित ई-वे बिल क्लोजर नियम का एक स्वर में विरोध किया।
बैठक में बताया गया कि जीएसटी विभाग द्वारा प्रस्तावित नियम के अनुसार ई-वे बिल को क्लोज करने का अधिकार सप्लायर, रिसीवर, ट्रांसपोर्टर तथा वाहन चालक (ड्राइवर) को दिए जाने का प्रस्ताव है। ट्रांसपोर्ट व्यापारियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ई-वे बिल क्लोज करने की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर एवं ड्राइवर पर डालना पूरी तरह अनुचित एवं अव्यावहारिक है। उनका कहना था कि वर्तमान में ट्रांसपोर्टर पहले से ही ई-वे बिल अपडेट करने जैसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ई-वे बिल क्लोजर की अतिरिक्त जिम्मेदारी थोपना ट्रांसपोर्ट उद्योग पर अनावश्यक बोझ बढ़ाने के समान होगा।
व्यापारियों ने जीएसटी जांच के दौरान वाहनों को रोकने की वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई मामलों में जांच के लिए रोकी गई गाड़ियों का चार से पांच दिनों तक निस्तारण नहीं हो पाता। विभागीय अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों की कमी एवं पर्याप्त स्थान के अभाव का हवाला दिया जाता है, जिसके कारण वाहन लंबे समय तक शहर के बीचों-बीच अथवा सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं। इससे यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न होती है तथा वाहनों एवं उनमें लदे माल की चोरी अथवा क्षति की संभावना भी बढ़ जाती है।
संवाद कार्यक्रम में ट्रांसपोर्ट व्यापारियों ने एक अन्य महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में बसों के माध्यम से माल परिवहन किया जा रहा है। कई मामलों में बिना उचित ई-वे बिल अथवा आवश्यक दस्तावेजों के माल एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाया जाता है, जिससे कर चोरी की संभावना बनी रहती है। व्यापारियों ने कहा कि ऐसे परिवहन पर प्रभावी निगरानी आवश्यक है, क्योंकि इसकी जानकारी न तो विभाग को समय पर मिल पाती है और न ही सरकार को वास्तविक स्थिति का आकलन हो पाता है। उन्होंने मांग की कि वैध रूप से कार्य कर रहे ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय कर चोरी रोकने के लिए प्रभावी एवं समान व्यवस्था लागू की जाए।
ट्रांसपोर्ट व्यापारियों ने मांग की कि ई-वे बिल क्लोजर प्रक्रिया से ट्रांसपोर्टर एवं वाहन चालकों को बाहर रखा जाए, जांच के लिए रोके गए वाहनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे निर्दोष ट्रांसपोर्ट व्यापारियों और माल स्वामियों को अनावश्यक परेशानियों एवं आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम में जीएसटी विभाग की ओर से श्रीमती सुमन चैरसिया (उपायुक्त राज्य कर), श्री कुंवर रॉबिंस (उपायुक्त राज्य कर), श्री जितेंद्र कुमार गुप्ता (सहायक आयुक्त राज्य कर), श्री नितिन कुमार (सहायक आयुक्त राज्य कर), श्री संजय सरोज (सहायक आयुक्त राज्य कर), श्री शिशिर रंजन सिंह (राज्य कर अधिकारी) तथा श्री विशाल चैधरी (राज्य कर अधिकारी) उपस्थित रहे।
ट्रांसपोर्ट क्षेत्र की ओर से ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह भाटिया, उपाध्यक्ष राम आसरे वर्मा, महामंत्री आचार्य भूपेश गौरव, सदस्य गौरव पांडे सहित लखनऊ गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, लखनऊ ट्रक ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन, लखनऊ ट्रांसपोर्ट नगर व्यापार मंडल तथा अन्य ट्रांसपोर्ट संगठनों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट व्यापारी उपस्थित रहे।
बैठक में अधिकारियों ने ट्रांसपोर्ट व्यापारियों द्वारा उठाए गए विभिन्न बिंदुओं को गंभीरता से सुना तथा उनके सुझावों एवं आपत्तियों को उच्च स्तर पर विचारार्थ भेजने का आश्वासन दिया। ट्रांसपोर्ट व्यापारियों ने अपेक्षा व्यक्त की कि भविष्य में परिवहन क्षेत्र से संबंधित कोई भी नया नियम लागू करने से पूर्व ट्रांसपोर्ट संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा, जिससे व्यापार सुगमता एवं राजस्व हितों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
