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राहुल गांधी को पाकिस्तान की लाइन को आगे लेने के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए-बीजेपी प्रवक्ता


पाकिस्तान का ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल विमानों को मार गिराने का दावा झूठा साबित हुआ है. भारतीय वायुसेना के एक दस्तावेज से इसकी पोल खुली है. अब इस मुद्दे पर बीजेपी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है. राफेल विमान को लेकर कांग्रेस नेता की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की है.

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, 'राहुल गांधी को पाकिस्तान की लाइन को आगे लेने के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए. जब ऑपरेशन सिंदूर चल रहा था, तब उन्होंने पूछा गया था कि हिंदुस्तान के कितने राफेल गिरे थे. यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने नींबू मिर्ची दिखाकर राफेल का मजाक उड़ाया था. IAF का मेंटिनेंस ऑर्डर यह साफ करता है कि भारत का एक भी राफेल नहीं गिरा था. अब सवाल उठता है कि जानबूझकर पाकिस्तान की लाइन को आगे ले जाना राहुल गांधी ने क्यों सही समझा.'

उन्होंने आगे कहा, यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने ऐसा किया हो. जब कांग्रेस की सरकार थी, तब 26/11 का आतंकी हमले के बाद में पाकिस्तान पर हमला करने से भारतीय सेना को कांग्रेस ने रोका था. आज यह वापस से साबित होता है कि जब भारत और पाकिस्तान में से चुनने की बात आती है तो वह पाकिस्तान की लाइन को आगे ले जाते हैं. जब चीन के समय में हिंदुस्तान के जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था, तब राहुल गांधी ने कहा था कि भारत के जवान पीटे गए. इससे साफ होता है कि वह भारत विरोधी हैं और दुश्मनों के फायदे की बात करते हैं.'

'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयानों को आधार बनाकर सरकार से सीधे तौर पर यह सवाल पूछा था कि 'इस कार्रवाई के दौरान भारतीय वायुसेना को कितने विमानों (राफेल) का नुकसान उठाना पड़ा?' उन्होंने सरकार पर सच छुपाने का आरोप लगाया था.

बता दें, भारतीय वायुसेना ने एक सरकारी दस्तावेज जारी किया है, जिसमें यह साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का कोई राफेल फाइटर जेट नष्ट हुआ था. इंडिय एयरफोर्स ने फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation और उससे जुड़े पार्टनर के लिए राफेल बेड़े के रखरखाव और संचालन सहायता से संबंधित एक आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) यानी टेंडर जारी किया है.

दस्तावेज में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारतीय वायुसेना 36 राफेल लड़ाकू विमानों का संचालन कर रही है और इन विमानों के लिए पांच महीने की अवधि के लिए ब्रिज सपोर्ट की जरूरत है. दस्तावेज में यह भी जिक्र है कि प्रस्तावित ब्रिज सपोर्ट अनुबंध के दौरान सभी 36 रफाल विमानों के संचालन को ध्यान में रखते हुए उड़ान घंटों की गणना की गई है.

डिफेंस एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर भारत के किसी राफेल विमान का नुकसान हुआ होता और वह बेड़े का हिस्सा नहीं रहता, तो ऐसी स्थिति में रखरखाव और उड़ान घंटों की योजना में विमानों की संख्या अलग दिखाई दे सकती थी.

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