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वंचितों के लिए वरदान बनेगा जन सेवा दल का फॉर्मूला: 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी'


लखनऊ |  प्रदेश की राजनीति में हाशिए पर मौजूद अति पिछड़े, वंचित और अति दलित समाज को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने के लिए 'जन सेवा दल' ने क्रांतिकारी राजनीतिक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व 'विधान केसरी' के संपादक श्री विनेश ठाकुर के नेतृत्व में तैयार यह फॉर्मूला अति पिछड़ों के लिए बड़ा वरदान साबित होगा। पार्टी का स्पष्ट नारा है— "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।" अब तक केवल वोट बैंक बनकर रह गए अति पिछड़े वर्ग के लोग अब अधिकार मांगने वाले नहीं, बल्कि सत्ता में बैठकर अधिकार बांटने वाले बनेंगे। जन सेवा दल ने कहा है कि अति दलित वर्ग का साथ मिला तो प्रदेश में जनसंख्या के सटीक अनुपात में न सिर्फ टिकट बांटे जाएंगे, बल्कि सत्ता में भी ऐतिहासिक हिस्सेदारी दी जाएगी।  

सत्ता का महा-प्लान: राजनीतिक प्रतिनिधित्व की विसंगतियों को दूर करने के लिए सत्ता में आने पर प्रदेश में 5 उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे, जो अलग-अलग वंचित और अति पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व करेंगे। साथ ही, प्रत्येक वंचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाएगा, ताकि हर तबका खुद नीतियां तय कर सके।  

2027 टिकट बंटवारा: 2027 विधानसभा चुनाव के लिए जनसंख्या आधारित खाका तैयार है। अति पिछड़ा वर्ग: सैनी, शाक्य, कुशवाहा, मौर्य, पाल, प्रजापति, कश्यप, विश्वकर्मा, सैन, सविता, नंद, यादव, कुर्मी, लोधी, गुर्जर, निषाद, राजभर, चौरसिया, लोनिया चौहान, तेली, माली, बारी आदि को आबादी के अनुपात में टिकट। मुस्लिम वर्ग: सलमानी, सैफी, अंसारी, धोबी, शेख, सैयद, पठान को भी अनुपातिक भागीदारी। SC/अति दलित: चमार, जाटव, पासी, कोरी, वाल्मीकि के लिए सीटों का स्पष्ट आवंटन। कुल 403 में शेष सीटों पर कोई भी जाति लड़ सकेगी। यह हिस्सेदारी टिकट के साथ सरकारी नौकरी, ठेकेदारी, न्यायपालिका, कार्यपालिका, मीडिया तक लागू होगी।  

एक महीने में कल्याण बोर्ड: सरकार बनने के एक माह भीतर सभी वंचित व अति पिछड़ी जातियों के लिए 'प्रत्येक जाति कल्याण बोर्ड' गठित होगा। कड़ा कानून: जातिगत अपमान या नफरती जातिसूचक शब्दों पर *3 साल जेल व 1 लाख जुर्माना*। सामंतवादी सोच वालों को चिह्नित कर सीधे जेल भेजा जाएगा।  

अन्य प्रमुख वादे: पूर्ण बहुमत पर सभी भूमिहीनों को एक-एक एकड़ जमीन।

 हर ग्राम पंचायत में बेरोजगार युवाओं को 

3% ब्याज पर 10 लाख तक ऋण ताकि 50,000/माह कमा सकें। 50% शराब दुकानें अति पिछड़ों को आवंटित।

 किसानों को MSP पर 1000 रुपये/क्विंटल बोनस व बंजर भूमि हेतु मुफ्त ट्यूबवेल। शिक्षामित्र, अनुदेशक, सफाई कर्मचारी, आंगनबाड़ी, रसोइया, आशा बहुओं को स्थायी कर OPS बहाल

। 40 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को 15,000 रुपये मासिक मानदेय व जिला स्तर पर न्यूनतम किराए पर सरकारी आवास।  

जन सेवा दल के इस फॉर्मूले ने यूपी की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। दस्तकारों, पिछड़ों और वंचितों को 'मांगने वाले से बांटने वाला' बनाने का यह संकल्प यदि जमीन पर उतरता है, तो यह प्रदेश की राजनीति में नए युग की शुरुआत होगी।

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