प्रतापगढ़। जनपद में सृजना साहित्यिक संस्था उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में महान समाज सुधारक एवं तत्वदर्शी सन्त कबीर की जयंती सृजनाकुटीर, अजीतनगर में श्रद्धा व उत्साह से मनाई गई। सर्वप्रथम उनके चित्र पर माल्यार्पण किया गया। सन्त कबीर की रचनाओं - तू कहता कागद की लेखी मैं कहता आंखन की देखी, झीनी झीनी बीनी चदरिया, कबीर खड़ा बाजार में इत्यादि की व्याख्या भी की गई।
अध्यक्षता करते हुए लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार - समीक्षक एवं अनुवादक डॉ. दयाराम मौर्य श्रत्नश् ने कहा कि कबीर समाज में व्याप्त रूढ़ियों, कुरीतियों और अंधविश्वास के विरुद्ध खुलकर बोलते थे। जाति,पंथ, ऊंचनीच भेदभाव मिटाकर मानवता की स्थापना उनका लक्ष्य था। वे महान समाज सुधारक थे। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। मुख्य अतिथि समर्पित समाजसेवी रोशनलाल ऊमरवैश्य ने कहा कि कबीर के चिंतन का केंद्र जनकल्याण था। उन्होंने कुरीतियों को दूर करने और समाज को जोड़ने पक्षधर थे। वे सबके अनुकूल मर्यादाजनक समाज बनाना चाहते थे। चिंतक-कवि आनन्द मोहन ओझा ने कबीर पर रचना पाठ किया और कहा कि कबीर निर्गुण निराकार ब्रह्म के उपासक थे। वे विरक्त सन्त थे।
संचालन साहित्यकार - शिक्षक अनिल कुमार निलय ने किया। काव्यपाठ करने वालों में कुंजबिहारी लाल मौर्य काकाश्री, श्रीनाथ मौर्य सरस, अमरनाथ गुप्ता बेजोड़, राधेश्याम दीवाना, समाजसेवी सुनील कुमार सिंह, राजेश हर्षपुरी,व सौम्या सिंह प्रमुख रहे।
