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विचारों में मतभेद हो सकते, लेकिन मनभेद कभी नहीं-सचिन पायलट


राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया तीखे हमलों के कुछ दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने बुधवार को कहा कि वह अपने साथ काम करने वाले सभी नेताओं का सम्मान करते हैं।

साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद कभी नहीं रहे। करौली जिले के ग्राम सकरघटा में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए पायलट ने गहलोत का नाम लिए बिना सार्वजनिक जीवन और राजनीति में अनुशासन, संयम और धैर्य के महत्व पर जोर दिया।

राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जो लोग राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं और जिनके साथ हमने काम किया है, मैं प्रत्येक व्यक्ति का दिल से मान-सम्मान करता हूं। हमारे विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मन से कोई मतभेद नहीं है।' उन्होंने कहा, ‘अगर आप किसी की आंखों में आंखें डालकर देखेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि वह सच बोल रहा है या झूठ।’

पायलट ने यह भी कहा कि किसी के साथ उनकी कोई व्यक्तिगत दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत सोच-समझकर बोलता हूं क्योंकि एक बार जब शब्द मुंह से निकल जाते हैं तो वे वापस नहीं आते। सच्चाई के साथ खड़े होना जरूरी है। संयम जरूरी है। संतोष जरूरी है। सम्मान देना जरूरी है।’

पायलट ने कहा, ‘दुनिया भर में लोग कैसा व्यवहार करते हैं, यह हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन हम अपने बच्चों को कैसे संस्कार देते हैं, यह हमारे हाथ में है। दुनिया चाहे जो कहे, लेकिन यदि हम अपनी अगली पीढ़ी को शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी देंगे, तभी देश सही दिशा में आगे बढ़ेगा।’

राजनीतिक जीवन में अनुशासन और धैर्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, ‘जीवन और राजनीति में अनुशासन, संयम और धैर्य बेहद महत्वपूर्ण हैं। हमारी पहली प्राथमिकता देश और प्रदेश की जनता है, जबकि दूसरी प्राथमिकता हमारी विचारधारा और पार्टी है। जो मेहनत करता है, उसकी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए पायलट ने कहा, ‘वह (राहुल गांधी) कहते हैं कि हमें 'मोहब्बत की दुकान' खोलनी है। कोई व्यक्ति हमसे असहमत हो सकता है या हमारी बात न माने, लेकिन उसे इतना सम्मान और प्यार दें कि वह स्वयं आपके साथ चलने लगे।’ हाल में अशोक गहलोत ने कहा था कि सितंबर 2022 की घटना कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ बगावत नहीं थी, बल्कि सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की संभावना को लेकर विधायकों के बीच असहमति का परिणाम थी।

जयपुर में 25 सितंबर 2022 को कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष को राज्य के नेतृत्व परिवर्तन पर निर्णय लेने का अधिकार देने वाला एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित किया जाना था। हालांकि, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पर्यवेक्षकों के जयपुर पहुंचने और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा आधिकारिक बैठक बुलाए जाने के बावजूद कई विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बजाय वे गहलोत के करीबी सहयोगी और तत्कालीन मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर इकट्ठा हो गए।

नतीजतन, कांग्रेस में आमतौर पर पारित होने वाला यह प्रस्ताव कई वर्षों में पहली बार पारित नहीं हो सका। गहलोत ने यह भी कहा कि उनके वफादार विधायक पायलट को छोड़कर पार्टी नेतृत्व द्वारा चुने गए किसी भी नेता को स्वीकार करने को तैयार थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पायलट द्वारा 2020 में उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ की गई बगावत के कारण विधायकों में नाराजगी थी। उस समय पायलट उप-मुख्यमंत्री थे। गहलोत ने यह भी कहा कि पायलट को ‘सच स्वीकार करना’ चाहिए और अपनी गलती माननी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा इसलिए बना रहा क्योंकि पायलट ने ऐसा नहीं किया। गहलोत और पायलट के बीच की प्रतिद्वंद्विता कई सालों तक राजस्थान की राजनीति मुख्य चर्चा रही थी। पायलट ने 2020 में गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी, जिससे राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। बाद में पार्टी नेतृत्व के दखल के बाद यह संकट सुलझा।

बगावत के कारण पायलट को उप-मुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था। करौली के ग्राम सकरघटा में पायलट ने अपने पिता दिवंगत राजेश पायलट की मूर्ति का अनावरण भी किया। उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता ने भारतीय वायुसेना में पायलट की अपनी प्रतिष्ठित नौकरी से इस्तीफा देकर इंदिरा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर जनसेवा का मार्ग चुना था। वह जीवन की आखिरी सांस तक कांग्रेस पार्टी के एक जांबाज सिपाही बनकर जनता के हक के लिए लड़ते रहे।’ पायलट ने कहा कि उनके पिता का मानना था कि सच्चा राजनेता वही है जो लोभ, लालच और पदों की अंधी दौड़ से दूर रहकर केवल जनता का मन जीतने और उनके कल्याण के लिए कार्य करें, ताकि इतिहास उन्हें हमेशा आदर के साथ याद करें।

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