पीलीभीत। जिले के गन्ना किसानों का धैर्य आखिरकार शनिवार को जवाब दे गया। महीनों से बकाया गन्ना मूल्य भुगतान का इंतजार कर रहे सैकड़ों किसानों ने कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार के नेतृत्व में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार के आवास का घेराव कर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उन्होंने कई माह पहले मिलों को गन्ने की आपूर्ति कर दी थी, लेकिन अब तक उनका पूरा भुगतान नहीं हुआ है। भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण किसान आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और खेती-किसानी के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है।
सुबह से ही जिले के विभिन्न क्षेत्रों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों से मंत्री आवास की ओर पहुंचने लगे। देखते ही देखते सैकड़ों किसानों की भीड़ मंत्री आवास के बाहर एकत्र हो गई। किसानों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार तथा गन्ना विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। ष्मंत्री जी सुनो पुकार, कर्ज में डूबा है परिवारष्, ष्गन्ना मंत्री होश में आओ, किसानों का पेमेंट कराओष् और ष्जब तक पैसा नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगाष् जैसे नारों के बीच किसानों ने अपनी पीड़ा और नाराजगी खुलकर जाहिर की।
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना था कि समय पर भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। खाद, बीज, डीजल, कीटनाशक और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि गन्ने का पैसा अटका हुआ है। कई किसानों ने बताया कि उन्हें खेती का खर्च चलाने और पारिवारिक जरूरतें पूरी करने के लिए बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर हैं।
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र बकाया भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। किसानों का कहना था कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि भुगतान की स्पष्ट समय-सीमा और ठोस कार्रवाई चाहिए।
धरने का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का अन्नदाता आज अपने ही पैसे के लिए भटकने को मजबूर है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों का भुगतान रोके रखना उनके अधिकारों का हनन है और सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर किसानों को उनका हक दिलाना चाहिए।
कुमुद गंगवार ने धरना स्थल से ही राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार से दूरभाष पर वार्ता कर किसानों की समस्याओं को विस्तार से बताया और लंबित भुगतान को प्राथमिकता के आधार पर जारी कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल वादे नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम देखना चाहते हैं। किसानों ने भी संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाकर लिखित आश्वासन देने की मांग की।
सूत्रों के अनुसार राज्य मंत्री ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर वार्ता कर समाधान निकालने का भरोसा दिया। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन और भुगतान की ठोस कार्ययोजना नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो जिलेभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना था कि हजारों किसान परिवार भुगतान के इंतजार में आर्थिक संकट झेल रहे हैं और अब उनकी अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
मंत्री आवास के बाहर अचानक बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस, सुनगढ़ी थाना पुलिस समेत अन्य थानों की अतिरिक्त पुलिस फोर्स को तत्काल मौके पर बुलाया गया। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए मंत्री आवास और आसपास के क्षेत्र को पुलिस सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।
स्थिति पर नजर रखने के लिए अधिकारियों की टीम लगातार सक्रिय रही। सिटी मजिस्ट्रेट विजयवर्धन तोमर स्वयं मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता कर माहौल शांत करने का प्रयास किया। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। बाद में किसानों को आवास के बाहर खुले मैदान में एकत्र कर धरना जारी रखने की अनुमति दी गई।अधिकारियों ने किसानों की मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया और पूरे घटनाक्रम के दौरान हालात पर लगातार नजर बनाए रखी। प्रशासन की सक्रियता के चलते प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और स्थिति नियंत्रण में रही। हालांकि किसानों के तेवर और आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों का मानना है कि यदि बकाया भुगतान का मुद्दा जल्द नहीं सुलझा तो आने वाले दिनों में आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
