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यूपी समेत कई राज्यों में समय से पहले हो सकते हैं विधानसभा चुनाव: विनेश ठाकुर कर्पूरी


  • आगामी जनगणना और चुनाव की दोहरी जिम्मेदारी से प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव की संभावना
  • ​सूत्रों के हवाले से बड़ा दावा- समय से पहले चुनाव कराने के विकल्पों पर मंथन तेज

नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत देश के कुछ अन्य राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय से पहले कराए जा सकते हैं। इस बात की प्रबल संभावनाओं को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट बेहद तेज हो गई है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और सूत्रों का हवाला देते हुए विनेश ठाकुर कर्पूरी ने बताया कि आगामी राष्ट्रीय जनगणना और विधानसभा चुनावों की तारीखों के आपस में टकराव को देखते हुए सरकार और निर्वाचन आयोग के स्तर पर कई गंभीर प्रशासनिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

​विनेश ठाकुर कर्पूरी के अनुसार, उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य में चुनाव संपन्न कराना अपने आप में एक बहुत बड़ी प्रशासनिक और सुरक्षा चुनौती होती है। ऐसे में यदि उसी समयावधि के भीतर देश की आगामी महा-जनगणना का कार्य भी शुरू होता है, तो सरकारी मशीनरी, जिलाधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त और अभूतपूर्व दबाव बढ़ जाएगा। इसी दोहरी जिम्मेदारी और संभावित प्रशासनिक संकट से बचने के लिए चुनाव को तय समय से कुछ महीने पहले कराने की रणनीति पर गहन मंथन चल रहा है।

प्रशासनिक तालमेल और परिसीमन पर भी नजर

​चर्चाओं के मुताबिक, यदि चुनाव आयोग और संबंधित मंत्रालय इस बात पर सहमत होते हैं, तो उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव वक्त से पहले देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही, जनगणना के बाद भविष्य में होने वाले लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन  की लंबी प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र और राज्यों के बीच एक व्यापक समन्वय बनाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक दलों में बढ़ी हलचल

​विनेश ठाकुर कर्पूरी ने आगे बताया कि समय से पहले चुनाव होने की इन सुगबुगाहटों ने राज्य के राजनीतिक दलों को भी पूरी तरह सतर्क कर दिया है। जहां एक ओर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए संभावित चुनावी परिस्थितियों को भांपना शुरू कर दिया है, वहीं समाजवादी पार्टी  सहित अन्य विपक्षी दल भी अपनी रणनीतियों को धार देने में जुट गए हैं। हालांकि, इस पूरे विषय पर अभी तक चुनाव आयोग या गृह मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों के लिहाज से अंदरूनी तैयारियां बेहद तेज हैं।

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