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पीलीभीतः भगवान प्रभु श्री राम -हनुमान पर कथित टिप्पणी पड़ी भारी, पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य एमपी-एमएलए कोर्ट में घिरे! न्यायालय में स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ परिवाद दर्ज


पीलीभीत। भगवान श्रीराम, राम मंदिर और हनुमान जी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पीलीभीत स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में उनके खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले का संज्ञान लेते हुए परिवाद दर्ज कर लिया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह परिवाद माँ ज्वालामुखी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी की ओर से दाखिल किया गया। उनका आरोप है कि 23 जून को गाजीपुर जिले में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान श्रीराम, राम मंदिर और हनुमान जी के संबंध में अमर्यादित एवं अपमानजनक टिप्पणियां कीं। शिकायत के अनुसार उन्होंने हनुमान जी के पौराणिक प्रसंगों का उपहास उड़ाते हुए उनके अस्तित्व पर सवाल उठाए तथा सार्वजनिक मंच से ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। परिवाद में यह भी कहा गया है कि उक्त बयान सोशल मीडिया और विभिन्न टीवी चैनलों पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिससे देशभर के सनातन धर्मावलंबियों में रोष फैल गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह बयान समाज में वैमनस्य फैलाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है, इसलिए न्यायालय से विधिक कार्रवाई की मांग की गई। मामले की सुनवाई के दौरान पीठासीन अधिकारी सतीश कुमार ने परिवाद पर संज्ञान लेते हुए उसे दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद प्रकरण की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इस मामले में कई हिन्दू संगठनों ने भी शिकायतकर्ता का समर्थन किया है। अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष पंकज शर्मा, राष्ट्रीय हनुमान दल के अध्यक्ष अमित गुप्ता तथा युवा जागृति परिषद के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने स्वयं को साक्षी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर कथित अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ न्यायिक लड़ाई में वे शिकायतकर्ता का सहयोग करेंगे।शिकायतकर्ता पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता संतराम राठौर ने बताया कि स्वामी प्रसाद मौर्य के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299, 196(1), 197(1), 353(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत परिवाद दाखिल किया गया है। उनका दावा है कि प्रस्तुत साक्ष्यों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए संज्ञान लिया है।

उधर, इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिले में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां आगे की विधिक कार्रवाई तय होगी। फिलहाल मामले में परिवाद दर्ज होने के साथ न्यायिक प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

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