न्यायालय में विचाराधीन मुकदमा अपराध संख्या-20ध्1987, थाना लालगंज से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार 12 फरवरी 1987 को ग्राम पूरे मनज, मजरे आई में विवाद के दौरान दिनेश नारायण त्रिपाठी, छोटे लाल ओझा, राधेश्याम और राम सुमेर ने वादी पक्ष के लोगों के साथ मारपीट की, गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी तथा एक मकान के दरवाजे को क्षतिग्रस्त कर दिया था। मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 324, 427, 452, 504 एवं 506 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्तों को दोषी माना। हालांकि न्यायालय ने अपने निर्णय में उल्लेख किया कि अभियुक्तों के विरुद्ध अन्य किसी आपराधिक मामले का रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया और घटना अत्यंत पुरानी है। ऐसे में उन्हें कारावास से दंडित करने के बजाय अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 4 का लाभ दिया जाना न्यायोचित होगा।
अदालत ने चारों दोषसिद्ध अभियुक्तों को तीन वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा अधिकारी, प्रतापगढ़ के पर्यवेक्षण में रहने, शांति एवं सदाचार बनाए रखने, निवास स्थान बिना अनुमति परिवर्तित न करने, किसी भी मादक पदार्थ का सेवन न करने तथा इस अवधि में कोई अन्य अपराध न करने जैसी शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में अभियुक्तों को निर्धारित दंड भुगतने के लिए कारावास भेजा जा सकता है। यह फैसला 1 जून 2026 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विराट मणि त्रिपाठी द्वारा सुनाया गया।
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