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2006 का वो खतरनाक राजनीतिक मर्डर जिसने हिला दी थी पूरी महाराष्ट्र की सियासत


कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर की 2006 में हुई हत्या के बहुचर्चित मामले में मुंबई की स्पेशल CBI कोर्ट जल्द अपना फैसला सुनाने वाली है। पहले यह फैसला आज आने वाला था लेकिन ओमराजे निम्बालकर के वकील के कहने पर जज ने डेट बदलकर 20 जून कर दी। पूर्व मंत्री पदमसिंह पाटिल सहित 8 आरोपियों के खिलाफ यह फैसला आने वाला है। पदम सिंह पाटिल महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के सगे भाई हैं।

यह मामला लगभग 20 साल पुराना है और अदालत अपना फैसला सुनाने जा रही है। मुख्य आरोपियों के स्वास्थ्य कारणों से अदालत ने मई 2026 के मध्य में होने वाली सुनवाई को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था।

पवनराजे निंबालकर उस्मानाबाद जिले के एक प्रमुख कांग्रेस नेता थे। वह एक लोकप्रिय राजनीतिक हस्ती के तौर पर उभरे थे और उन्हें इलाके में वरिष्ठ NCP नेता पदमसिंह पाटिल के दबदबे को चुनौती देने वाले के तौर पर देखा जाने लगा था। पवनराजे ने शुरुआत में पदमसिंह के समर्थन से राजनीति में तरक्की की थी। उन्होंने टेरना शुगर फैक्ट्री और उस्मानाबाद जिला सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक जैसे कोऑपरेटिव संस्थानों में पद संभाले थे। हालांकि, जैसे-जैसे निंबालकर का राजनीतिक प्रभाव बढ़ा, दोनों नेताओं के बीच रिश्ते खराब हो गए।

पवनराजे निम्बालकर और पदमसिंह पाटिल रिश्ते में चचेरे भाई थे। 2006 में पवनराजे की हत्या के मामले में पदमसिंह पाटिल का नाम सामने आया था और इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। इसी वजह से धाराशिव की राजनीति में निम्बालकर और पाटिल परिवारों के बीच वर्षों से तीखा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलता है। आज भी ओमराजे निम्बालकर और रणजगजीतसिंह पाटिल अपने-अपने दलों के माध्यम से जिले की राजनीति के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं।

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