घर के आंगन में तिरंगे में लिपटे बेटे को देखकर मां कमला देवी की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। पिता रघुवीर सिंह बार-बार अपने जवान बेटे को निहारते रहे, मानो अभी वह उठकर उन्हें आवाज दे देगा। लेकिन नियति का फैसला कुछ और था। जिस बेटे पर पूरे परिवार को गर्व था, वह हमेशा के लिए खामोश हो चुका था।
30 वर्षीय ग्रेनेडियर सुनील कुमार भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। कुछ दिन पहले ही वह छुट्टी लेकर घर आए थे। परिवार में बेटे का जन्म हुआ था और हर तरफ खुशी का माहौल था। सुनील अपने नवजात बेटे को गोद में लेकर भविष्य के सपने बुन रहे थे। पत्नी रिंकू देवी के चेहरे पर भी मातृत्व की चमक थी। लेकिन 29 मई को एक सड़क दुर्घटना ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। मोटरसाइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए सुनील को पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में जयपुर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए। उनकी शहादत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
सोमवार को जयपुर से पार्थिव शरीर झुंझुनूं पहुंचा तो अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। झुंझुनूं से इंडाली गांव तक करीब 14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में तिरंगा लिए युवा "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "ग्रेनेडियर सुनील कुमार अमर रहे" के नारे लगा रहे थे। रास्ते भर लोग घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देते रहे। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर अंतिम सलाम किया गया। यह सिर्फ एक अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि अपने बेटे को खोने वाले परिवार के प्रति पूरे समाज की संवेदना और एक सैनिक के प्रति सम्मान का अभूतपूर्व दृश्य था।
सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया जब सुनील का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। गोद में 17 दिन का नवजात बेटा लिए पत्नी रिंकू देवी जैसे ही अपने पति के अंतिम दर्शन के लिए आगे बढ़ीं, उनकी चीख सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। जिस बच्चे ने अभी दुनिया को ठीक से देखना भी शुरू नहीं किया, उसके सिर से पिता का साया उठ चुका था। रिंकू देवी बार-बार पति को पुकारती रहीं और फिर बेसुध होकर गिर पड़ीं। यह दृश्य देखकर गांव की महिलाओं सहित वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें छलक उठीं।
