पीलीभीत। जनपद के ब्लॉक मरौरी क्षेत्र के गांव पूर्वाभूड़ा स्थित गौशाला में हुई एक दर्दनाक घटना ने गौवंशों की सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाघ गौशाला परिसर में घुस आया और वहां मौजूद एक गाय को अपना शिकार बना लिया। सुबह जब गोपालक और ग्रामीण गौशाला पहुंचे तो गाय का क्षत-विक्षत शव देखकर उनके होश उड़ गए। घटना की सूचना मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए।
गौशाला के पास रहने वाले लोगों का कहना है कि रात के समय किसी को घटना की भनक तक नहीं लगी। सुबह जब पशुओं की देखभाल के लिए लोग पहुंचे तो उन्हें गौशाला परिसर में संघर्ष के निशान दिखाई दिए। कुछ दूरी पर गाय का शव पड़ा मिला। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि बाघ अभी भी आसपास के इलाके में मौजूद हो सकता है।
ग्रामीणों और गोपालकों का आरोप है कि यह हादसा किसी प्राकृतिक कारण से नहीं बल्कि संबंधित विभागों की घोर लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि गौशाला के चारों ओर सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग तो कराई गई थी, लेकिन करीब 160 मीटर हिस्से में आज तक तारबंदी का कार्य पूरा नहीं किया गया। यही अधूरा हिस्सा बाघ के लिए गौशाला में प्रवेश का रास्ता बन गया। यदि समय रहते फेंसिंग पूरी कर दी जाती तो संभवतः यह घटना नहीं होती और एक बेजुबान गाय की जान बच सकती थी।पूर्वाभूड़ा गांव पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। यहां वर्षों से बाघ, तेंदुआ, जंगली सूअर और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही होती रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोग हमेशा वन्यजीवों के खतरे के बीच जीवन यापन करते हैं। ऐसे में गौशालाओं, खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है। इसके बावजूद गौशाला जैसी महत्वपूर्ण जगह की सुरक्षा व्यवस्था अधूरी छोड़ देना बेहद गंभीर मामला है।ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, पशुपालन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को अधूरी फेंसिंग तथा जंगली जानवरों के बढ़ते खतरे के बारे में अवगत कराया था। लेकिन किसी स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। लोगों का आरोप है कि यदि अधिकारियों ने समय रहते चेतावनियों को गंभीरता से लिया होता तो आज यह दुखद घटना देखने को नहीं मिलती।
घटना के बाद गौशाला में मौजूद अन्य गौवंशों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। गोपालकों का कहना है कि यदि बाघ एक बार गौशाला तक पहुंच गया है तो उसके दोबारा आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे गौशाला में रखे अन्य पशुओं की जान भी खतरे में है। कई ग्रामीणों ने मांग की है कि गौशाला के आसपास रात में विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाए और वन विभाग की टीम नियमित गश्त करे।स्थानीय लोगों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी केवल गौवंशों के लिए ही नहीं बल्कि इंसानों के लिए भी खतरा बन सकती है। गांव के कई लोग सुबह और शाम खेतों में काम करने जाते हैं। महिलाएं और बच्चे भी अक्सर गौशाला तथा आसपास के रास्तों से गुजरते हैं। ऐसे में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियां लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है।घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों और गोपालकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने कहा कि गौवंश संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहद कमजोर है। उनका कहना है कि यदि गौशालाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती तो संरक्षण के दावों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।
वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से ग्रामीणों ने तत्काल अधूरी तार फेंसिंग पूरी कराने, गौशाला की सुरक्षा बढ़ाने, रात्रिकालीन निगरानी की व्यवस्था करने तथा क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।इस संबंध में ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव ने बताया कि गौशाला की अधूरी तार फेंसिंग को शीघ्र पूरा कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौवंशों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही गौशाला परिसर को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
फिलहाल पूर्वाभूड़ा की यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में स्थित गौशाला की सुरक्षा व्यवस्था ही अधूरी छोड़ दी गई, तो गौवंशों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा? ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी जिम्मेदार विभाग नहीं चेते, तो आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं तथा इसकी कीमत बेजुबान पशुओं के साथ-साथ आम लोगों को भी चुकानी पड़ सकती है।
