लखनऊ। राजधानी के पॉश इलाके अलीगंज स्थित उषा मेहता मार्ग पर सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य घायल हैं। राहत एवं बचाव अभियान देर शाम तक जारी रहा।
आग लगते ही भवन धुएं से भर गया और जान बचाने के लिए कई छात्र-छात्राओं को खिड़कियों और बालकनी से छलांग लगानी पड़ी। मौके पर दमकल की कई गाड़ियां, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे तथा आसपास की इमारतों को खाली कराकर राहत कार्य चलाया गया। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट की जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
सबसे बड़ा सवाल-जिम्मेदार कौन?
- यह हादसा कई गंभीर सवाल छोड़ गया है
- क्या भवन में फायर सेफ्टी के मानकों का पालन किया गया था?
- क्या अग्निशमन विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र था?
- क्या भवन में पर्याप्त आपातकालीन निकास उपलब्ध थे?
क्या नगर निगम, एलडीए और संबंधित विभागों ने समय-समय पर सुरक्षा मानकों की जांच की थी?
यदि इन सवालों का जवाब श्नहींश् है, तो यह केवल एक हादसा नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता भी हो सकती है। इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है, ताकि यदि किसी विभाग या अधिकारी की लापरवाही सामने आए तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
