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अमेरिका और ईरान डील से भारत को बड़ी राहत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकले 11 भारतीय जहाज



अमेरिका और ईरान के बीच पिछले हफ्ते हुए तनाव कम करने के समझौते के बाद, भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि कच्चे तेल, गैस और उर्वरक लेकर भारत आ रहे 11 व्यापारिक जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं। इसके साथ ही, दो अन्य भारतीय जहाज भी भारत से फारस की खाड़ी की ओर रवाना हुए हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि दोनों दिशाओं से जहाजों की यह आवाजाही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता पर लगी पाबंदियों के हटने का संकेत देती है।

17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज काफी हद तक बंद था। भारत के 10 फ्लैग-वाहक जहाज फरवरी से ही इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिन्हें अब जल्द ही सुरक्षित निकालने की उम्मीद है।

जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद भारत फिर से ईरान से तेल खरीदना शुरू करेगा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रही है।

जायसवाल ने भारत की ऊर्जा नीति को दोहराते हुए कहा, "जहां तक हमारी ऊर्जा आपूर्ति का सवाल है, हमारी नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित पर आधारित है। हमारी नीति 1.4 अरब लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें किफायती दरों पर और अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा उपलब्ध कराने की है।"

साल 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेहरान पर प्रतिबंध लगाने से पहले, ईरान भारत के लिए ऊर्जा का एक अहम स्रोत था। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाला ईरान, 2010 के आस-पास तक भारत को तेल सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश था। वित्त वर्ष 2009-2010 में, भारत ने ईरान से 22.1 मिलियन टन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल आयात का 14% था।

मार्च में अमेरिका द्वारा अपने प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट की घोषणा के बाद, भारत ने अप्रैल में उस देश से कुछ तेल आयात किया। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि भारत, ईरान से तेल आयात की संभावना तलाशने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत और दोनों पक्षों द्वारा तय किए जाने वाले इंतजामों पर बारीकी से नज़र रख रहा है।

ईरानी नेताओं ने बार-बार कहा है कि तेहरान भारत को तेल की सप्लाई फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि जब 1998 में परमाणु परीक्षणों के बाद भारत पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे, तब ईरान उन कुछ देशों में से एक था, जिन्होंने भारत को तेल की सप्लाई नहीं रोकी थी।

भारत अपनी तेल की ज़रूरतों का लगभग 90% आयात करता है, और उसने वित्त वर्ष 2026 में 123 अरब डॉलर का तेल खरीदा। फिलहाल, भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है, जो जून में लगभग 50% थी, जबकि सऊदी अरब, इराक और UAE जैसे पारंपरिक बड़े सप्लायर्स की हिस्सेदारी अब कम हो गई है। हाल के महीनों में अमेरिका एक अहम सप्लायर के तौर पर उभरा है, क्योंकि भारत ने अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाई है।

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