NTA पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! कहा-दुर्भाग्यपूर्ण, अब तक सबक नहीं लिया
May 25, 2026
नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को लेकर सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने पेपर लीक की वजह से NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द किए जाने पर दुख जताया और कहा कि एनटीए ने अतीत से सबक नहीं लिया.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही थी. कोर्ट ने डॉक्टर्स और मेडिकल स्टूडेंट्स की तरफ से दाखिल उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है, जिनमें एनटीए को रिप्लेस किए जाने की मांग की गई है. कोर्ट ने यह भी पूछा है कि 2024 के उसके आदेश के बाद बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी की ओर से दिए गए सुझावों पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, जिससे NEET सिस्टम को मजबूत किया जा सके.
कोर्ट में वकील ने कहा कि यह 23 लाख छात्रों का मामला है. वकील ने कहा कि 21 जून को दोबारा परीक्षा होने वाली है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम इसमें एकदम से कुछ नहीं कर सकते. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एनटीए ने अतीत से सबक नहीं लिया. यह मामला पहले भी इस अदालत में आया था. एक समिति, एक निगरानी समिति गठित की गई थी जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें स्वीकार कर लिया गया था. हम चाहते हैं कि एनटीए समिति की ओर से सुझाई गई सिफारिशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करे.'
एडवोकेट तन्वी दुबे और डॉ. चारू माथुर के जरिए सुप्रीम कोर्ट में ये याचिकाएं दाखिल की गई हैं. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने वकील तन्वी दुबे के माध्यम से याचिका दायर की, जिस पर नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी समान मामलों को एक साथ नत्थी कर रहा है.सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन के नेतृत्व वाली केंद्र की ओर से नियुक्त समिति को एनटीए के कामकाज में सुधार करने और उसके निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण देने का निर्देश दिया.
चिकित्सा संस्था ने बार-बार पेपर लीक होने के कारण 22.7 लाख से अधिक छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधे सीधे हमला होने का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से सीधे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया और एनटीए के पुनर्गठन या उसके स्थान पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के संचालन के लिए एक मजबूत और स्वायत्त प्रणाली की स्थापना की मांग की है.
याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि जब तक पुन: परीक्षा की देखरेख के लिए औपचारिक रूप से एक नई समिति का गठन नहीं हो जाता तब तक एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति नियुक्त की जाए. याचिका में कहा गया है कि समिति में अध्यक्ष के रूप में सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फोरेंसिक वैज्ञानिक शामिल होने चाहिए, ताकि आगे कोई और डेटा लीक न हो.
चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए की ओर से तीन मई को आयोजित नीट-यूजी की परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बीच इसे 12 मई को रद्द कर दिया गया था, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है.

