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पहलगाम आतंकी हमला: NIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, टूरिस्ट गाइड चाहते तो बच सकती थी 26 लोगों की जान


पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है। NIA सूत्रों के मुताबिक अगर परवेज और बशीर नाम के टूरिस्ट गाइड चाहते तो 26 बेकसूर लोगों की जान बच सकती थी। पहलगाम में 26 लोगों का खून बहाने से एक दिन पहले तीनों आतंकियों फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू, हमजा अफगानी ने परवेज के इस ढोंक (झोपड़ी) में अल्लाह के नाम मदद मांगी, रोटी खाई, चाय पी और जाते जाते रोटी, सब्जी, हल्दी और नमक समेत पतीला और करछी भी अपने साथ ले गए थे।

सूत्रों के मुताबिक हमले से कुछ घंटों पहले भी परवेज और बशीर ने तीनों आतंकियों को बैसरन पार्क के बाहर फेंस पर बैठे देखा था। सूत्रों के मुताबिक पहलगाम के रहने वाले परवेज और बशीर अहमद वक्त रहते पुलिस और सुरक्षा बलों को जानकारी दे देते तो पहलगाम हमला नहीं होता। टूरिस्ट गाइड परवेज और बशीर ने यह बात कबूल की है कि पहलगाम हमले मैं शामिल तीनों आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा, और कश्मीर में सुरक्षा बलों के कैंप सुरक्षा बलों की मूवमेंट के बारे में पूछताछ की थी।

सूत्रों के मुताबिक कश्मीर टूरिस्ट गाइड का काम करने वाले बशीर अहमद ने इस बात को कबूल किया है कि 21 अप्रैल को तीनों आतंकवादियों को उसने देखा था आतंकियों ने बशीर से उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले जाने के लिए भी कहा था। जिसके बाद बशीर ने तीनों आतंकियों को एक पेड़ के नीचे रुकने को कहा उसके बाद बशीर अपने साथी परवेज के ढोंक पर गया और परवेज और उसकी पत्नी को चुप रहने को कहा। NIA सूत्रों के मुताबिक उसी शाम 5 बजे बशीर तीनों आतंकियों को इशारे से परवेज की ढोंक के अंदर बुलाता है।

सूत्रों के मुताबिक परवेज की ढोंक के अंदर जाते समय आतंकियों के हाथ में हथियार थे और तीनों आतंकी उर्दू में बात कर रहे थे जबकि उनका लहजा पंजाबी बोली का था बशीर हुलिया देख कर समझ गया था कि वो मुजाहिद हैं, इसके बाद तीनों आतंकियों ने कहा कि वह थके हुए हैं और उसके बाद तीनों आतंकियों ने परवेज से पीने के लिए पानी मांगा और अल्लाह के नाम पर उनकी मदद करने को कहा। सूत्रों के मुताबिक परवेज और बशीर तीनों आतंकियों की पूरी मदद करते हैं, उन्हें पानी पिलाते हैं, चाय पिलाते हैं और उसके बाद खाना भी खिलाते हैं। इस दौरान तीनों आतंकी आपस में और परवेज और बशीर से घंटों बातचीत करते रहे।

सूत्रों के मुताबिक 5 घंटे तक आतंकी परवेज की ढोंक में रुके थे और रात 10 बजे ढोंक से चले गए। जाते जाते तीनों आतंकियों फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू, हमजा अफगानी को परवेज और बशीर खाना पैक करके भी दिया। तीनों आतंकियों ने उनकी मदद करने के बदले परवेज और बशीर को 3000 रुपए भी दिए थे। इतना ही नहीं परवेज और बशीर ने 22 अप्रैल को बैसरन घाटी में आतंकी हमले से कुछ घंटे पहले उन्हीं तीनों आतंकियों को बैसरन पार्क के बाहर फेंस पर बैठे हुए देखा था।

परवेज और बशीर ने खुलासा किया है कि दोनों 2 टूरिस्ट को लेकर 22 अप्रैल को बैसरन पार्क गए थे, और जब टूरिस्ट को लेकर वापस लौटने लगे तभी तीनों आतंकियों को देखा था। जब दोनों बैसरन पार्क से नीचे पहलगाम पहुंचे तब ऊपर आतंकी हमला हो गया था जिसके बाद वो दोनों खामोशी से अंडरग्राउंड हो गए थे। यानी ये साफ है कि पहलगाम हमले में धर्म पूछकर लोगों का खून बहाने वाले तीनों आतंकियों को लोकल मदद मिली थी।

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