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भाजपा को MLC के लिए दलित-पिछड़ों में नहीं मिले कैंडिडेट, विनेश ठाकुर ने की युवाओं से अधिक से अधिक ग्रेजुएशन करने की अपील


 MLC चुनाव: "ढूंढने से भी नहीं मिल रहे ग्रेजुएट", टिकट वितरण पर विनेश ठाकुर का भाजपा और विपक्ष पर करारा तंज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशियों की सूची पर सियासी घमासान तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर प्रतिनिधित्व को लेकर छिड़ी बहस के बीच जन सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनेश ठाकुर 'कर्पूरी' ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद तीखा और अनूठा तंज कसा है। उन्होंने टिकट वितरण में दलित और पिछड़े वर्ग की अनदेखी को लेकर सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों को भी आड़े हाथों लिया है, वहीं समाज के युवाओं से उच्च शिक्षा और राजनीतिक चेतना की ओर बढ़ने की बड़ी अपील की है।

​"भाजपा बहुत प्रयास करती है, पर देश में ग्रेजुएट ढूंढें नहीं मिलते"

​विनेश ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा, "अगर दलित और पिछड़ों की 85 प्रतिशत आबादी में पढ़े-लिखे और तार्किक लोग होते, तो केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने वाली भाजपा ने कम से कम एक-दो को तो प्रत्याशी बनाया होता।" उन्होंने आगे चुटकी लेते हुए कहा, "लेकिन क्या करें, भाजपा तो बहुत प्रयास करती है कि देश में कोई (दलित-पिछड़ा) ग्रेजुएट मिल जाए, लेकिन उन्हें ढूंढने से भी नहीं मिलते।" ठाकुर का यह बयान सीधे तौर पर सत्तापक्ष की उस मानसिकता पर चोट करता है, जहां बड़ी आबादी होने के बावजूद उच्च सदनों के लिए इस वर्ग को योग्य नहीं समझा जाता। इसी सिलसिले में उन्होंने समाज के युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी शैक्षणिक योग्यता को इस स्तर पर ले जाएं कि कोई भी दल योग्यता का बहाना न बना सके।

​विपक्ष भी निशाने पर: "बसपा मैदान से बाहर, सपा तैयारी में नाकाम"

​विनेश ठाकुर ने केवल सत्तापक्ष को ही नहीं, बल्कि खुद को दलित-पिछड़ों का हितैषी बताने वाले विपक्षी दलों (सपा, बसपा और कांग्रेस) की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अब देखना यह है कि क्या इन दलों को अपनी सूचियों के लिए इस वर्ग के उम्मीदवार मिलते हैं या नहीं।

​इस दौरान उन्होंने चुनाव के गणित और विपक्षी रणनीति की कमियों को उजागर करते हुए कहा:

  • ​बसपा का रुख: मजेदार बात यह है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस चुनाव को लड़ ही नहीं रही है।
  • ​सपा की कमजोरी: समाजवादी पार्टी (सपा) को केवल दो वोटों की आवश्यकता है। यदि वह सही मायने में तैयारी करती, तो दलित और पिछड़ों के वोटों को समय रहते तैयार कराती और मजबूत दावेदारी पेश करती।

सोशल मीडिया पर पहले से गरमाया है माहौल

​गौरतलब है कि भाजपा द्वारा लखनऊ, आगरा, बरेली-मुरादाबाद, और मेरठ की सीटों के लिए घोषित पांचों उम्मीदवारों (अवनीश कुमार सिंह, डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. हरी सिंह ढिल्लों, उमेश द्विवेदी और श्रीचंद शर्मा) की सूची सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर नाराजगी देखी जा रही है। अकेश लोधी जैसे सोशल मीडिया यूजर्स ने भी पोस्ट साझा कर आरोप लगाया है कि इस चुनाव में एक भी दलित या पिछड़े को प्रत्याशी न बनाकर इस वर्ग को केवल "दरी बिछाने" तक सीमित कर दिया गया है।

​निष्कर्ष

​विनेश ठाकुर के इस बयान ने साफ कर दिया है कि आगामी विधान परिषद चुनाव केवल सामान्य चुनावी मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में 85 प्रतिशत आबादी के हक, हिस्सेदारी, शिक्षा और राजनीतिक चेतना की एक नई लड़ाई की रूपरेखा तैयार कर रहा है। अब देखना यह है कि विनेश ठाकुर के इस हमले और उनकी शिक्षा की अपील पर भाजपा और समाजवादी पार्टी की क्या प्रतिक्रिया आती है।

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