हाथरस। जिलाधिकारी ने अवगत कराया है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा सचेत ऐप के माध्यम से अलर्ट जारी किया गया है कि वर्तमान में जनपद का पारा 45 डिग्री सेल्यिस को पार करने की सम्भावना है। भीषण गर्मी, गर्म हवा व लू के प्रकोप से अपना बचाव कैसे करें तथा सुरक्षित कैसे रहें। हीट वेव (लू) से बचाव हेतु अपने मोबाइल फोन में एप डाउनलोड अवश्य करें। उक्त ऐप के माध्यम से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी तापमान, हीट वेव एवं मौसम संबंधी अलर्ट समय-समय पर प्राप्त होते रहते हैं।
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि सभी नागरिक प्राप्त अलर्ट एवं दिशा-निर्देशों का अनुपालन अवश्य करें, जिससे अत्यधिक गर्मी एवं लू के दुष्प्रभावों से बचाव किया जा सके। सतर्कता एवं सावधानी ही सुरक्षा का सर्वोत्तम उपाय है। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक सम्भव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें और बासी खाने का प्रयोग कदापि न करे और मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढ़ककर रखें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार जून व जुलाई के मध्यध्अधिक तापमान रहने की संभावना है।
लू के लक्षण- गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में तेजी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र का कम आना अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहंुचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
गर्म हवाएंध्लू की स्थिति में क्या करें और क्या न करें। रेडियो सुनिए, टीवी देखिए, स्थानीय मौसम समाचार के लिए समाचार पत्र पढ़ें। पर्याप्त पानी पियें-भले ही प्यास न लगे। खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू का पानी, छाछ आदि जैसे घरेलू पेय का इस्तेमाल करें। हल्के वजन, हल्के रंग के, ढीले, सूती कपड़े पहनें। अपना सिर ढंकें, कपड़े, टोपी या छतरी का उपयोग करें। अनावश्यक घर से बाहर प्रात-11.00 से सांयकाल-4.00 बजे तक न निकले बहुत ही आवश्यक होने पर चेहरे व सिर को ढककर ही निकले।
नियोक्ता और श्रमिक - कार्य स्थल के पास ठंडा पेयजल उपलब्ध कराएं। कार्यकर्ताओं को सीधे धूप से बचने को कहे। अति पारिश्रमिक वाले कार्र्यों को दिन के ठन्डे समय मे निर्धारित करें। बाहरी गतिविधियों के लिए ब्रेक की आवृत्ति में वृद्धि करें। गर्भवती श्रमिकों और श्रमिकों जिन्हें चिकित्सा देख-भाल की अचानक जरुरत हो तो उन पर अतिरिक्त ध्यान दें।
वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों के लिये - तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें। उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा गर्म शरीर पर गीला तौलिया रखें। उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें।
शिशुओं के लिये - शिशुओं को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं। शिशुओं में गर्मी की वजह से होने वाली बीमारियों हेतु चिकित्सक से सलाह अवश्य लें। यदि बच्चों के पेशाब का रंग गहरा है तो इसका मतलब है कि वह डिहाईड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हैं। बच्चों को बिना देखरेख खड़ी गाड़ी में छोड़ कर न जाएं।
पशुओं के लिए - जहां तक संभव हो, तेज गर्मी के दौरान उन्हें घर के भीतर रखें। यदि उन्हें घर के भीतर रखा जाना संभव न हो तो उन्हें किसी छायादार स्थान में रखें, जहां वे आराम कर सकें। ध्यान रखें कि जहां उन्हें रखा गया हो वहां दिनभर छाया रहें। जानवरों को किसी बंद में न रखें, क्योंकि गर्म मौसम में इन्हें जल्दी गर्मी लगने लगती है। उनसे सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच काम न लें। ध्यान रखें कि आपके जानवर पूरी तरह साफ हों, उन्हें ताजा पीने का पानी दें, पानी को धूप में न रखें। पीने के पानी के दो बाउल रखें ताकि एक में पानी खत्म होने पर दूसरे से वे पानी पी सकें। किसी भी स्थिति में जानवर को वाहन में न छोडे। शेड में पंखे, वाटर स्प्रे और फॉगर्स का प्रयोग करें।
अन्य सावधानियाँ - जितना हो सके घर के अंदर रहें। अपने घर को ठंडा रखें। पर्दे, शटर या धूप का उपयोग करें और खिड़कियां खुली रखें। निचली मंजिलों पर रहने का प्रयास करें। पंखे का प्रयोग करें, सूती कपड़े पहनें, कपड़ों को नम रखें और ठंडे पानी में स्नान करें। यदि आप बेहोश या कमजोरी महसूस करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए। जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें।

