मऊ। जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता के निर्देशन में शनिवार को जिला महिला अस्पताल एवं ब्लॉक स्तरीय चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) का आयोजन किया गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अप्रैल 2026 से 16 मई 2026 तक कुल 3643 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से 248 महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) के रूप में चिन्हित कर उनका उपचार शुरू किया गया।
डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि जनपद में प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को यह अभियान चलाया जाता है। गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए अब मैन्युअल पर्ची के माध्यम से निःशुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था की गई है। शिविर में दूसरे व तीसरे त्रैमास की गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन, शुगर, एचआईवी, ब्लड प्रेशर, वजन और यूरिन टेस्ट जैसी तमाम जांचें निःशुल्क की गईं। इसके साथ ही लाभार्थियों की ग्रुप काउंसलिंग कर उन्हें संस्थागत प्रसव के लाभ समझाए गए।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.के. यादव ने कहा कि जांच का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) का समय रहते पता लगाना है, ताकि माँ और भ्रूण दोनों के जीवन को सुरक्षित किया जा सके। जिला मातृत्व स्वास्थ्य परामर्शदाता अंजू रंजन ने बताया कि जिन महिलाओं में जटिलता की संभावना पाई गई, उनके एमसीपी (मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन) कार्ड पर लाल रंग की एचआरपी मोहर लगाकर उन्हें चिन्हित किया गया।
जिला महिला चिकित्सालय में गंभीर एनीमिया (रक्तअल्पता) से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए डॉ. मिथिलेश रस्तोगी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान खून की कमी को तेजी से नियंत्रित करने के लिए एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सीमल्टोज) इंजेक्शन बेहद प्रभावी है। इस विशेष पहल का शुभारंभ सीएमएस डॉ. नीलेश द्वारा किया गया। अभियान के तहत टीडी का टीकाकरण करने के साथ ही आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम और एल्बेंडाजोल जैसी आवश्यक दवाएं भी निःशुल्क वितरित की गईं।

