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लखनऊ: राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर पर समाज की उपेक्षा का आरोप ! शोशल एक्टिविस्ट शिबू ठाकुर ने खोला मोर्चा


लखनऊ/पटना।नाई, नंदवंशी और हजाम समाज के अधिकारों और स्वाभिमान की लड़ाई में उस समय एक नया मोड़ आ गया, जब समाज के प्रखर वक्ता और युवा नेता शिबू ठाकुर ने शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली और मानसिकता पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। शिबू ठाकुर के इस तीखे और साहसिक बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनैतिक गलियारों तक एक नई बहस छेड़ दी है।

​'बिहार जागरण' के प्रधान संपादक डॉ. राकेश कुमार की विशेष रिपोर्ट के बाद, अब शिबू ठाकुर का आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने समाज के बड़े चेहरों को आईना दिखाते हुए आम जनता के दर्द और आत्मसम्मान को प्रमुखता से उठाया है।

​"चुनाव में वोट हमारा, तो सामाजिक मंचों पर हीन भावना क्यों?" : शिबू ठाकुर

​शीर्ष नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए शिबू ठाकुर ने कहा: "हमारा समाज वर्षों से अपने अस्तित्व और पहचान को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहा है। जब भी चुनाव आते हैं, हमारे समाज के युवा, बुद्धिजीवी और आम लोग एकजुट होकर बड़े नेताओं के पक्ष में पूरी ताकत झोंक देते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी समाज ने केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर जी के परिवार की डॉ. जागृति ठाकुर को जाति और समाज के नाम पर बिना शर्त समर्थन दिया और उन्हें आगे बढ़ाया। लेकिन आज मैं समाज के आम आदमी की तरफ से यह पूछना चाहता हूं कि बदले में इस समाज को क्या मिला? क्या हमें वह सम्मान और आत्मीयता मिली जिसके हम हकदार थे?"

​उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर समाज के युवा जिन बड़े नेताओं को अपना आदर्श मानकर दिन-रात उनकी तस्वीरें और पोस्ट शेयर करते हैं, हकीकत में वे नेता आम लोगों से एक गहरी दूरी बनाकर रखते हैं।

​उपनामों (Titles) को लेकर मानसिकता पर उठाए सवाल

​शिबू ठाकुर ने अपने बयान में समाज के लोगों की पहचान से जुड़े शब्दों पर हो रहे भेदभाव को भी उजागर किया। उन्होंने कहा:​"चाहे कोई अपने नाम के साथ नाई लिखे, हजाम लिखे, सेन लिखे या नंदवंशी ठाकुर लिखे—यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हमारा गौरव और हमारी विरासत है। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है कि जैसे ही 'नाई' या 'हजाम' जैसे शब्द सामने आते हैं, समाज के ही कुछ बड़े और रसूखदार लोग दूरी बना लेते हैं। वे आम लोगों को बराबरी की नज़र से देखने के बजाय हीन भावना से देखते हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि अगर आप अपने ही समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति के नाम और पहचान को सहजता से स्वीकार नहीं कर सकते, तो आप किस हक से समाज का नेतृत्व करने का दावा करते हैं?"

​समाज से अपील: "चेहरा और पद देखकर नहीं, व्यवहार देखकर आदर्श चुनें"

​बयान के अंत में शिबू ठाकुर ने पूरे देश और प्रदेश के नाई व नंदवंशी समाज के युवाओं और बुद्धिजीवियों से एक भावुक और जागरूक अपील की है। उन्होंने कहा कि अब आंख बंद करके किसी को भी अपना मसीहा मानने का दौर खत्म हो चुका है।

  • ​व्यवहार ही असली पैमाना है: किसी का बड़ा पद, राजनीतिक रसूख या चर्चित चेहरा होना उसे सच्चा नेता नहीं बनाता। सच्चा आदर्श वही है जो समाज के सबसे कमजोर और सामान्य व्यक्ति को भी गले लगाए और उसे बराबरी का सम्मान दे।
  • ​बदलाव का समय: आज ऑल इण्डिया नाई समाज और सैन समाज के भीतर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। समाज अब केवल चुनाव के समय याद किए जाने वाले नेताओं को बर्दाश्त नहीं करेगा।

​"सम्मान मांगने से नहीं, व्यवहार से मिलता है।" शिबू ठाकुर ने स्पष्ट किया कि समाज अब केवल उसी नेतृत्व को स्वीकार करेगा जो समाज के हर व्यक्ति को दिल से अपनाएगा  और उसके सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।


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