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सोनम वांगचुक से मिले उपराज्यपाल विनय सक्सेना, भड़काऊ बयानबाजी से बचने की दी नसीहत


पर्यावरणविद सोनम वांगचुक द्वारा हाल ही में लद्दाख की स्थिति की तुलना मणिपुर से किए जाने के बाद उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उन्हें भड़काऊ और भ्रामक बयानबाजी से बचने की सलाह दी है। मंगलवार को लद्दाख के एलजी विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि उन्होंने सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ खुलकर बातचीत की। बता दें कि गीतांजलि आंग्मो उस समय चर्चा में आई थीं जब वांगचुक हिरासत में थे और उन्होंने उनके समर्थन में आवाज उठाई थी।

सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का मतलब यह नहीं है कि कोई झूठी बातें फैलाए या लोगों को भड़काने की कोशिश करे। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने भी माना कि लद्दाख की तुलना मणिपुर से करना 'गलत आकलन' था। सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'हमने इस बात पर सहमति जताई कि विकास कार्यों और राजनीतिक संवाद के बीच सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी है। मैंने श्री वांगचुक को सलाह दी कि वे भ्रामक और उकसाने वाली बातें करने से बचें, क्योंकि इससे सार्वजनिक चर्चा का माहौल खराब होता है।'

LG ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, 'लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को झूठ फैलाने और लोगों को भड़काने का लाइसेंस नहीं माना जा सकता। वांगचुक ने स्वीकार किया कि लद्दाख की तुलना मणिपुर से करना उनके फैसले की गलती थी। बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी की उत्पत्ति के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इसके संस्थापकों के उद्देश्यों को समझने के बाद जरूरत पड़ने पर अपने समर्थन पर दोबारा विचार करेंगे।'

सक्सेना ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए सकारात्मक विकास कार्यों के बावजूद लगातार रैलियां और प्रदर्शन लद्दाख की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और अशांति का माहौल बनने से इसका नुकसान हो सकता है। LG ने बताया कि वांगचुक ने हाल के दिनों में शुरू किए गए कई विकास कार्यों की सराहना की जिनमें हिम सरोवर परियोजना, इगू फे नहर की बहाली, माहे-टोपको नहर का निर्माण और बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान जैसी योजनाएं शामिल हैं।

हाल ही में सोनम वांगचुक ने कहा था कि उनकी रिहाई के आदेश में 'विश्वास का माहौल बनाने' की बात कही गई थी, लेकिन जमीन पर हालात वैसे नहीं दिख रहे। उन्होंने कहा था, 'पिछला सप्ताह बहुत नकारात्मक रहा। हर तरफ टकराव की स्थिति थी। मुझे लगा कि लद्दाख दूसरा मणिपुर बन जाएगा और हालात उसी दिशा में जा रहे थे।' वांगचुक के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

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