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संग्रामपुर: कभी चिट्ठियां सिर्फ संदेश नहीं, बल्कि अपनों की यादें लेकर आती थी


संग्रामपुर/अमेठी। समय बदल चुका है एक ऐसा समय था जब डाकिया का लोग बेसब्री से इंतजार करते थे लेकिन आज मोबाइल फोन ने निस्संदेह चिट्ठियों के प्रभाव और उपयोग को बहुत कम कर दिया है।जिसका यह प्रभाव है कि कई वर्षों से टंगा लेटर बाक्स पूरी तरह जर्जर दिखाई देने लगा है।उसके अन्दर गंदगी भरी गई है। विकास खंड संग्रामपुर मुख्यालय पर नीम के पेड़ की डाल से लगा लेटर बाक्स में चिट्ठी की जगह पक्षियों ने अपना घर बना लिया है।इसमें लगे ताला को जंग ने पूरी तरह जकड़ लिया है।आज डाक विभाग का कोई भी कर्मचारी इस बाक्स का हालचाल भी लेने नहीं आये संग्रामपुर ब्लॉक पर आये बुजुर्ग फरियादी ने कहा कि आज मोबाइल फोन का युग है पहले डाकिया के आने का हफ्ते भर इंतजार करते थे लेकिन अब वीडीओ कालिंग और मैसेजिंग ने दूरियों को मिटा दिया है बुजुर्ग विद्वान ने बताया कि चिट्ठियां सिर्फ संदेश नहीं बल्कि अपनों की यादें लेकर आती थी जो अब के मोबाइल संदेशों में खो गई है। लेकिन लगातार मोबाइल उपयोग शारीरिक  और मनोवैज्ञानिक समस्या उत्पन्न कर रहा है।आज के लोगों को मोबाइल के उपयोग से आंख में समस्या नीद की कमी और सामाजिक अलगाव बढ़ रहा है।

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