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कल रखा जाएगा एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त


प्रत्येक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत कर चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण किया जाता है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को एकदंत संकष्टी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के एकदंत रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान एकदंत को गणेश जी के अष्टविनायक रूपों में से एक माना जाता है। इस साल एकदंत संकष्टी का व्रत 5 मई 2026 को रखा जाएगा। तो आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय के समय के बारे में।

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 5 मई को सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर होगा। चतुर्थी तिथि का समापन 6 मई 2026 को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 26 मिनट रहेगा। एकदंत संकष्टी व्रत के दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 40 मिनट से सुबह 5 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। ये दोनों ही मुहूर्त पूजा-पाठ के लिए उत्तम माने जाते हैं।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी के इन मंत्रों का करें जाप
  • श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
  • ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
  • ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
  • ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
  • ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥
  • ॐ गं गणपतये नमः॥
एकदंत चतुर्थी व्रत का महत्व

एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश भगवान की पूजा करने से जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।इसके साथ ही गणेश जी की पूजा करने से व्यक्ति में कई अच्छे गुण भी आते हैं। गणेश जी की पूजा करने से अहंकार दूर होता है, भक्तों के क्रोध में कमी आती है, वाणी मधुर होती है।

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