लायक हुसैन
आजमगढ़। सरकारी सेवा में अक्सर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों तक सीमित दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जो अपने पद को समाज परिवर्तन का माध्यम बना देते हैं। ऐसे ही प्रेरणादायी अधिकारियों में शामिल हैं वर्ष 2013 बैच के पीसीएस अधिकारी गंभीर सिंह, जो वर्तमान में जनपद आजमगढ़ में एडीएम एफ.आर के पद पर तैनात हैं। प्रशासनिक, न्यायिक और पारिवारिक दायित्वों का सफल निर्वहन करने के साथ-साथ वे शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा के क्षेत्र में भी लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
प्रशासनिक सेवा के साथ शिक्षा क्रांति, सामाजिक जागरूकता और मानव सेवा को नई दिशा दे रहे हैं एडीएम एफ.आर गंभीर सिंह
साधारण परिवार से निकलकर बने हजारों युवाओं की प्रेरणा
गंभीर सिंह का जन्म बिजनौर के एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, संघर्ष और सकारात्मक सोच के बल पर सफलता हासिल कर नई इबारत लिखी।
कॉरपोरेट क्षेत्र में सेवाएं देने के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और सात बार पीसीएस इंटरव्यू देने के बाद वर्ष 2013 में डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित होकर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया।वे मुरादाबाद, अमरोहा, बलिया, हसनपुर, गाजियाबाद समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों पर उपजिलाधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट एवं अपर जिलाधिकारी जैसे अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। हर जिम्मेदारी में उनकी कार्यशैली संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनहित के लिए समर्पण का उदाहरण रही।
नया विचार नई ऊर्जा फाउंडेशन’ से जलाई शिक्षा की अलख
शिक्षा को बनाया समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यमसमाज के वंचित वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से गंभीर सिंह ने ‘नया विचार नई ऊर्जा फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ की स्थापना की।इस फाउंडेशन के माध्यम से गरीब, असहाय और शिक्षा से दूर बच्चों तक निशुल्क शिक्षा, कोचिंग, पुस्तकालय, करियर मार्गदर्शन और शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।वे शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, विद्यालय प्रबंधकों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ लगातार बैठकें कर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा जागरूकता अभियान चलाते हैं। कई गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक सुधार की नई चेतना जगाई गई।
‘परिवर्तन पाठशाला’ बना रही युवाओं का भविष्य
ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में संचालित ‘परिवर्तन पाठशाला’ आज हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। इन पाठशालाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पढ़ाई करने वाले मेधावी छात्रों को ही शिक्षक बनाकर मानदेय दिया जाता है, जिससे शिक्षा के साथ रोजगार का अवसर भी तैयार हो रहा है।अब तक लगभग 100 गांवों में परिवर्तन पाठशालाएं संचालित की जा चुकी हैं, जबकि 40 गांवों को लगभग पूर्ण रूप से शिक्षित करने का उल्लेखनीय कार्य भी किया गया है।
आरटीई के तहत 25 हजार बच्चों को दिलाया शिक्षा का अधिकार
शिक्षा चैपाल और जनजागरूकता अभियानों से बदली हजारों परिवारों की सोचगंभीर सिंह ने विभिन्न जिलों में सेवा के दौरान राइट टू एजुकेशन (त्ज्म्) के अंतर्गत लगभग 25 हजार से अधिक बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।गाजियाबाद में नगर मजिस्ट्रेट और एडीएम सिटी रहते हुए मात्र दो वर्षों में करीब 13 हजार बच्चों को आरटीई के तहत स्कूलों में दाखिला दिलाया गया।उनकी ‘शिक्षा चैपाल’ पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों की सोच बदलने का कार्य किया और गरीब परिवारों के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा।
हसनपुर से लेकर अन्यारी तक विकास और बदलाव की मिसाल
जहां समस्याएं थीं, वहां पहुंचाई रोशनी, शिक्षा और स्वच्छताहसनपुर में एसडीएम रहते हुए उनकी कार्यशैली के कारण तहसील हसनपुर प्रदेश की श्रेष्ठ तहसीलों में गिनी जाने लगी।उन्होंने सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटवाने, अतिक्रमण रोकने और राशन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में प्रभावशाली कार्य किया।उनके प्रयासों से ग्राम ईकौना में वर्षों से लंबित विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ, जबकि ग्राम जयतोली में जलभराव और गंदगी जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान कराया गया।ग्राम फतेहपुर जिवाई में निशुल्क कोचिंग सेंटर और पुस्तकालय स्थापित किए गए।तहसील कांठ के ग्राम अन्यारी में बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी शिक्षित करने का अभियान चलाया गया और गांव को पूर्ण साक्षर घोषित कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।
आपका हेलमेट कहां है?’ अभियान बना जनआंदोलन
सड़क सुरक्षा को नियम नहीं, जीवन रक्षा का संदेश बनाया, सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती मौतों से चिंतित होकर गंभीर सिंह ने ‘आपका हेलमेट कहां है?’ अभियान की शुरुआत की।इस अभियान के माध्यम से लोगों को हेलमेट पहनने के प्रति जागरूक किया गया और सड़क सुरक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया।वकीलों, लेखपालों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और रोटरी क्लब जैसे मंचों को अभियान से जोड़कर उन्होंने इसे जनजागरूकता आंदोलन का रूप दिया।विशेष रूप से करवा चैथ, रक्षा बंधन और भाई दूज जैसे त्योहारों पर हेलमेट जागरूकता अभियान चलाकर सड़क सुरक्षा का भावनात्मक संदेश दिया गया। इसी के साथ गंभीर सिंह के सामाजिक और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान से प्रभावित होकर उन्हें रेडक्रॉस सोसाइटी में लाइफटाइम मेंबरशिप दी।
मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता के संवाहक
गरीब बच्चों के बीच मनाते हैं खुशियां और बांटते हैं प्रेरणागंभीर सिंह और उनकी पत्नी अंजली सिंह अपने पुत्र का जन्मदिन भी गरीब और जरूरतमंद बच्चों के बीच ही मनाते हैं।इस अवसर पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं आयोजित कर प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया जाता है तथा कॉपी, पेन, स्कूल बैग और अन्य शैक्षिक सामग्री वितरित की जाती है।जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक गैर बराबरी जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से वे धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों को भी समाज के वंचित वर्गों के साथ साझा करते हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिला सम्मान
शिक्षा, समाज सेवा और मानवता के कार्यों को मिली वैश्विक पहचान, गंभीर सिंह को शिक्षा, पर्यावरण और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।उन्हें ‘लिम्का बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड’, ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान’, ‘इंटरनेशनल एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड 2020’, ‘भारत रत्न अटल श्री सम्मान’, ‘उत्तर प्रदेश रत्न अवार्ड’, ‘डॉ. अंबेडकर सद्भावना अवार्ड’, ‘डंडियाज रियल हीरो अवार्ड 2020’ तथा रेस्पांसविलिटी एक्सीलेंस अवार्ड लंदन 2022’ सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। अभिनेता विवेक ओबेरॉय और अभिनेत्री भाग्यश्री द्वारा भी उन्हें शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में सम्मानित किया जा चुका है।
ऐसे अधिकारी समाज को देते हैं नई दिशा
प्रशासनिक सेवा को जनसेवा और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बना रहे हैं गंभीर सिंह-
गंभीर सिंह यह साबित करते हैं कि प्रशासनिक सेवा केवल सरकारी दायित्व निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम भी बन सकती है। शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और मानव सेवा के प्रति उनका समर्पण आज हजारों युवाओं और जरूरतमंद लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। उनकी सोच और कार्यशैली वास्तव में ‘जय शिक्षा क्रांति’ के उस संकल्प को मजबूत करती है, जिसमें शिक्षा को समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत माना गया है।

