पीलीभीत। जनपद की राजनीति में शुक्रवार को उस समय जबरदस्त भूचाल आ गया, जब नगर पालिका प्रशासन ने भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर बुलडोजर चलाकर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। सड़कों पर बैरिकेडिंग, मौके पर तैनात पुलिस फोर्स और प्रशासनिक अफसरों की सक्रियता ने साफ संकेत दे दिया था कि प्रशासन किसी भी कीमत पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
कार्यालय ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी ने इसे सीधे-सीधे “लोकतंत्र की हत्या”, “विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश” और “सत्ता प्रायोजित बुलडोजर राजनीति” करार दिया है। वहीं प्रशासनिक अमला इसे नगर पालिका की संपत्ति पर कब्जा हटाने की नियमित कार्रवाई बता रहा है।सपा जिला अध्यक्ष जगदीश सिंह ‘जग्गा’ ने कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मामला पिछले कई महीनों से न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 18 मई को निर्धारित थी। इसके बावजूद भाजपा सरकार के दबाव में प्रशासन ने न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में कार्यालय को जमींदोज कर दिया।उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने और जनता के मुद्दे उठाने वाली आवाज को दबाने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है। सपा जिला अध्यक्ष ने ने कहा कि जब मामला अदालत में लंबित था तो प्रशासन को इंतजार करना चाहिए था, लेकिन सत्ता के इशारे पर लोकतांत्रिक मूल्यों को रौंद दिया गया।
सपा नेताओं के अनुसार, नगर पालिका द्वारा पूर्व में भी भारी पुलिस बल के सहारे कार्यालय खाली कराने का प्रयास किया गया था। उस दौरान समाजवादी पार्टी न्यायालय पहुंची थी और अदालत के निर्देश पर मौके का निरीक्षण भी कराया गया था। निरीक्षण में कार्यालय के भीतर पार्टी का सामान और पार्टी के ताले मौजूद पाए गए थे। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया और नोटिस के कार्रवाई जारी रखी।सपा का आरोप है कि नगर पालिका कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ मिलकर कार्यालय से पार्टी का सामान जबरन हटाया और उसे नुकसान पहुंचाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि इसकी शिकायत लगातार उच्च अधिकारियों से की जाती रही, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।शुक्रवार को हुई कार्रवाई के दौरान बुलडोजर सीधे भवन पर चढ़ा दिया गया और देखते ही देखते वर्षों पुराना सपा कार्यालय मलबे में तब्दील हो गया। मौके पर मौजूद सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। कई कार्यकर्ताओं की आंखें नम दिखीं तो कई भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।
सपा जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी समाजवादी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गई है। यही कारण है कि विपक्षी दलों के कार्यालयों और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह सत्ता के दबाव में काम कर रहे हैं और संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया गया है।
उन्होंने कहा कि बिना वैधानिक नोटिस, बिना अंतिम न्यायिक आदेश और बिना संवैधानिक प्रक्रिया के कार्यालय गिराना न्यायपालिका का भी अपमान है। सपा इस मामले को न्यायालय में पूरी मजबूती से उठाएगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।दरअसल यह पूरा विवाद वर्ष 2005 से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी ने नगर पालिका से तत्कालीन ईओ आवास को 15 वर्षों के लिए किराए पर लेकर जिला कार्यालय बनाया था। वर्ष 2020 में किरायेदारी की अवधि समाप्त हो गई। इसके बाद नगर पालिका ने भवन खाली करने का नोटिस जारी किया।सपा जिला अध्यक्ष ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए न्यायालय की शरण ली। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक राहत पाने की कोशिश की गई, लेकिन पार्टी को कोई स्थायी राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद नगर पालिका प्रशासन ने भवन को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया तेज कर दी। पूर्व में नगर पालिका ने भवन से सपा का सामान बाहर निकलवाया था और शुक्रवार को आखिरकार बुलडोजर कार्रवाई करते हुए पूरे भवन को ध्वस्त कर दिया गया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और विपक्षी दलों पर हमले के रूप में पेश करेगा, जबकि सत्ता पक्ष इसे सरकारी संपत्ति से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई बताकर अपने कदम को सही ठहराएगा।फिलहाल पीलीभीत की राजनीति में बुलडोजर की यह गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। एक तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानूनी बता रहा है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इसे लोकतंत्र पर सीधा प्रहार बताकर सड़क से अदालत तक लड़ाई लड़ने की बात कह रही है।

