आगरा। चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) के आगरा डायसिस से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और धन गबन के मामले में नया मोड़ सामने आया है। थाना हरिपर्वत में दर्ज मुकदमे में आगरा डायसिस के बिशप विजय कुमार नायक सहित अन्य पदाधिकारियों को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत मिली है। न्यायालय ने बयान दर्ज कराने की कार्रवाई पर स्टे आदेश जारी किया है।
मामले में भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष अशोक कुशवाहा ने कुछ दिन पूर्व पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर न्यायालय के आदेश के आधार पर अपने बयान और साक्ष्य दर्ज कराने की मांग की थी। उनका कहना है कि डायसिस के बिशप विजय कुमार नायक एवं अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धन गबन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के कई साक्ष्य मौजूद हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लग सके।
सूत्रों के अनुसार पुलिस आयुक्त द्वारा थाना हरिपर्वत को मुख्य शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, हालांकि अब तक बयान दर्ज नहीं हो सके हैं। बताया जा रहा है कि आरोपियों की ओर से मुकदमे को निराधार बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। न्यायालय ने मामले को समाप्त करने के बजाय फिलहाल स्टे देकर राहत प्रदान की है।
शिकायतकर्ता अशोक कुशवाहा का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को स्थायी राहत मिलने की संभावना कम है और भविष्य में न्यायालय द्वारा कार्रवाई तय मानी जा रही है। आरोप है कि डायसिस से जुड़े कुछ पदाधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपये के धन गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा अनाधिकृत कब्जों के माध्यम से आर्थिक अनियमितताएं की गईं।
वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि वर्षों से डायसिस के विभिन्न पदों पर जमे कुछ पदाधिकारियों के बीच धन और पदों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी विवाद भी सामने आ रहे हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजर टिकी हुई है।

