पीलीभीत। जनपद के मरौरी विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया भजा में उचित दर की दुकान के चयन को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच खींचतान का माहौल बन गया है। गांव के दर्जनों राशनकार्ड धारकों ने जिलाधिकारी पीलीभीत को सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना पत्र सौंपते हुए उचित दर की दुकान के चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि चुनाव में केवल उन्हीं लोगों को मतदान का अधिकार दिया जाए जिनके पास वैध राशनकार्ड हैं और जो संबंधित दुकान से जुड़े उपभोक्ता हैं।
ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि ग्राम पंचायत पिपरिया भजा में वर्तमान में दो उचित दर की दुकानें संचालित हैं। इनमें से एक दुकान के कोटेदार रामचंद्र की मृत्यु हो जाने के बाद उक्त दुकान रिक्त हो गई थी। इसके बाद नई दुकान के आवंटन और चयन प्रक्रिया को लेकर गांव में कई बार बैठकों का आयोजन किया गया, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
ग्रामीणों का कहना है कि उचित दर की दुकान के चयन को लेकर पहले भी चार से पांच बार बैठकों का आयोजन किया जा चुका है। इसके बावजूद सहमति नहीं बन सकी और मामला लगातार विवादों में घिरता चला गया। ग्रामीणों के अनुसार 7 मई 2026 को ग्राम पंचायत में खुली बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें ग्राम सभा के माध्यम से चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। बैठक में कोरम भी पूरा हुआ तथा विभिन्न स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता में रखने का प्रस्ताव भी सामने आया।हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसे लोगों को भी शामिल करने की कोशिश की जा रही है जिनका राशन दुकान से सीधा संबंध नहीं है। इससे निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि राशन की दुकान सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवारों से जुड़ा विषय है, इसलिए इसके चयन में केवल वास्तविक राशनकार्ड धारकों की राय को ही महत्व दिया जाना चाहिए।प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि बाहरी हस्तक्षेप या गैर पात्र लोगों को मतदान का अधिकार दिया गया तो गांव में विवाद और बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए केवल पात्र उपभोक्ताओं को ही मतदान करने दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जल्द उचित कार्रवाई करने की मांग की है। प्रार्थना पत्र पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान दर्ज हैं, जिससे गांव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर नाराजगी और असंतोष साफ दिखाई दे रहा है।उधर गांव में राशन की दुकान के चयन को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते निष्पक्ष निर्णय नहीं लिया तो मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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