बीसलपुर। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के वरिष्ठ एवं सक्रिय पत्रकारों को सम्मानित कर उनके समाज और लोकतंत्र के प्रति योगदान को सराहा गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता के इतिहास, उसके महत्व तथा वर्तमान समय में पत्रकारों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वच्छ गंगा मिशन के प्रांत संयोजक एवं सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रवि शरण सिंह चैहान ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता केवल समाचारों का माध्यम नहीं, बल्कि जनजागरण, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण का सशक्त उपकरण रही है। उन्होंने बताया कि 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित ‘उदंत मार्तंड’ ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी थी। उसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में प्रत्येक वर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता चैथे स्तंभ के रूप में कार्य करती है और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पत्रकारों को निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा और सामाजिक सरोकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बालाजी गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या अर्चना चैहान ने कहा कि पत्रकार समाज के सजग प्रहरी होते हैं। वे जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के साथ-साथ आमजन की आवाज को बुलंद करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की निर्भीक लेखनी अनेक बार पीड़ित और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने का माध्यम बनती है, इसलिए समाज को उनके योगदान का सम्मान करना चाहिए।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार महिपाल गंगवार ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की भावना से भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि ‘उदंत मार्तंड’ ने हिंदी भाषी समाज को अपनी भाषा में समाचार उपलब्ध कराने की शुरुआत की थी, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम माना गया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि पत्रकारों को अपने दायित्वों, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्वों का पुनः स्मरण कराने का भी दिन है।
महिपाल गंगवार ने कहा कि बदलते डिजिटल युग में पत्रकारिता की चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन सत्य और निष्पक्षता के मूल सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने युवाओं से तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि एक जागरूक पत्रकार समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बन सकता है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के विकास, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में पत्रकारों के योगदान पर भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पत्रकारों को सम्मानित कर उनके कार्यों की सराहना की गई। सम्मान प्राप्त करने वालों में मृदुल किशोर त्रिगुणित, सत्यवान अवस्थी, मनोज पाठक, महिपाल गंगवार, जितेंद्र गंगवार, पातीराम गंगवार, सत्येंद्र गंगवार, सारिक शेख सहित अनेक पत्रकार शामिल रहे।
समारोह में पत्रकारों, शिक्षकों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आलोक शुक्ला एवं नितिन अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा।
हिंदी पत्रकारिता दिवस के इस आयोजन ने पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, उसकी सामाजिक उपयोगिता तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को नई पीढ़ी के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
