लखनऊ/उन्नाव स उत्कर्ष ग्लोबल फाऊंडेशन की ओर से जनपद उन्नाव के सफीपुर क्षेत्र स्थित कंपोजिट विद्यालय सकहन राजपूतान में “प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्थानीय समुदाय को प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों से अवगत कराना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक के पुनः उपयोग तथा पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने अत्यंत उत्साह एवं सक्रियता के साथ भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिवार एवं संस्था के प्रतिनिधियों के स्वागत के साथ हुई। विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन उत्कर्ष ग्लोबल फाऊंडेशन की कार्यक्रम प्रबंधक पूनम झा द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को व्यवस्थित एवं प्रेरणादायक ढंग से संचालित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूनम झा ने बच्चों को “प्लास्टिक ट्रिपल आर” अर्थात त्मकनबम, त्मनेम और त्मबलबसम की अवधारणा को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में प्लास्टिक प्रदूषण विश्व के सामने सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक बन चुका है। एक बार उपयोग होने वाला प्लास्टिक न केवल धरती को प्रदूषित करता है, बल्कि नदियों, तालाबों, खेतों एवं जीव-जंतुओं के जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि यदि हम प्लास्टिक का कम उपयोग करें, पुराने सामान का पुनः उपयोग करें तथा अनुपयोगी वस्तुओं को रिसायकल करें, तो हम पर्यावरण को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।पूनम झा ने विद्यार्थियों से कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी आज से ही छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाना शुरू कर दें, जैसे कपड़े के थैले का उपयोग करना, प्लास्टिक बोतलों का कम इस्तेमाल करना, कूड़े को इधर-उधर न फेंकना तथा घर और विद्यालय में स्वच्छता बनाए रखना, तो आने वाला भारत अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बन सकता है।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शिखा सिंह ने अपने संबोधन में बच्चों को सूखे एवं गीले कचरे के अंतर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घरों एवं विद्यालयों में निकलने वाले कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में डालना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने हरे और नीले डस्टबिन की उपयोगिता को समझाते हुए कहा कि गीले कचरे, जैसे भोजन अवशेष, फल एवं सब्जियों के छिलके आदि को अलग रखना चाहिए, जबकि सूखे कचरे, जैसे प्लास्टिक, कागज, बोतलें एवं अन्य रिसायकल योग्य वस्तुओं को अलग डस्टबिन में डालना चाहिए। इससे कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया सरल होती है और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलती है। बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मकता ने उपस्थित सभी लोगों को प्रभावित किया।प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त अन्य गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने वाले विद्यार्थियों को भी प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त कर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे और उनमें आगे भी सामाजिक एवं पर्यावरणीय गतिविधियों में भाग लेने का उत्साह दिखाई दिया।इस अवसर पर विद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। बच्चों ने शिक्षकों एवं संस्था के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर विद्यालय परिसर की साफ-सफाई की। विद्यार्थियों ने परिसर में फैले प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को एकत्रित कर उचित स्थान पर डाला तथा स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता का व्यावहारिक महत्व समझाया गया।विद्यालय के शिक्षकों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई। शिक्षक विनय कुमार, रविंद्र कुमार, जितेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, आलोक मिश्रा एवं मनोज कुमार ने विद्यार्थियों को अनुशासन, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में प्रेरित किया। शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण उत्साह, ऊर्जा एवं सकारात्मक संदेशों से भर गया। बच्चों ने स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित नारों के माध्यम से सभी को जागरूक किया। “प्लास्टिक हटाओ दृ पर्यावरण बचाओ”, “स्वच्छ विद्यालय दृ स्वस्थ विद्यार्थी”, “कचरा अलग करो दृ पर्यावरण सुरक्षित करो” जैसे नारों से पूरा विद्यालय गूंज उठा। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।उत्कर्ष ग्लोबल फाऊंडेशन द्वारा चलाया जा रहा “प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान” समाज में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनता जा रहा है। संस्था लगातार विद्यालयों, समुदायों एवं सामाजिक मंचों के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रही है। संस्था का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि लोगों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से उत्कर्ष ग्लोबल फाऊंडेशन एवं सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। विद्यालय प्रशासन ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में सामाजिक चेतना विकसित करने के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। विद्यालय की ओर से यह आशा व्यक्त की गई कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।अंततः सभी विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों ने मिलकर प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने तथा स्वच्छता बनाए रखने की शपथ ली। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण एवं सकारात्मक संदेश के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि समाज को स्वच्छ और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास भी सिद्ध हुआ।

