सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक तरफ जनसुनवाई पोर्टल के जरिए आम जनता की समस्याओं के त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण का दम भरती है, वहीं जिले के दोस्तपुर थाने से एक बेहद चैंकाने वाला मामला सामने आया है। दोस्तपुर थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक का तो साफ मानना है कि यहाँ शिकायत करने पर निवारण नहीं, बल्कि सीधे हवालात की हवा खानी पड़ सकती है।
मामला दोस्तपुर थाना क्षेत्र का है, जहां तैनात उपनिरीक्षक जगदीश सिंह का एक हैरान करने वाला फरमान चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि उपनिरीक्षक ने खुलेआम कहा, ष्दोस्तपुर थाना क्षेत्र से संबंधित शिकायत करोगे तो निवारण या निस्तारण नहीं होगा, बल्कि सीधे शांति भंग में चालान किया जाएगा... यही प्ळत्ै का नियम है।ष्
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब एक स्थानीय पत्रकार जनता की समस्या को लेकर शिकायत कर दिया। उम्मीद थी कि पुलिस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करेगी, लेकिन उपनिरीक्षक जगदीश सिंह ने मामले को सुलझाने या उसका निस्तारण करने के बजाय, शिकायतकर्ता पत्रकार सहित उसके दो भाई का ही सीधे शांति भंग के तहत चालान काट दिया।
पुलिसकर्मी के इस रवैए ने कानून व्यवस्था और पीड़ितों की आवाज दबाने के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं क्या दोस्तपुर पुलिस के लिए न्याय का मतलब शिकायतकर्ता को ही सीधे अपराधी बना देना है? मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट (जनसुनवाई पोर्टल) को लेकर अगर पुलिस का यह रवैया है, तो आम जनता अपनी फरियाद लेकर कहां जाएगी? जब लोकतंत्र के चैथे स्तंभ यानी एक पत्रकार के साथ शिकायत करने पर ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो आम नागरिक की बिसात ही क्या है? इस पूरे मामले के बाद अब देखना यह होगा कि सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक चारू निगम और प्रशासनिक अमला इस निरंकुश बयानबाजी और कार्रवाई को लेकर उपनिरीक्षक जगदीश सिंह पर क्या एक्शन लेता है। क्या पत्रकार को न्याय मिलेगा या पुलिसिया हठधर्मिता के आगे यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?।

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