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नई दिल्ली: बड़ी राजनीतिक हलचल! चंद्रशेखर आज़ाद की मौजूदगी में आयुष चौहान ने थामा ASP का दामन, नूरपुर और बिजनौर की सियासत में भारी उलटफेर के संकेत: धामपुर से मुलचंद चौहान पर भी आजाद की नज़र

 
नई दिल्ली/बिजनौर (विधान केसरी)
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व मंत्री यशपाल चौहान के बेटे और कद्दावर नेता आयुष चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के केंद्रीय कार्यालय में अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर ली है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद ने खुद आयुष चौहान को पार्टी की सदस्यता दिलाई और उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।

​इस बड़े घटनाक्रम के बाद बिजनौर और विशेषकर नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस ज्वाइनिंग को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। और कयास लगाए जा रहे हैं धामपुर से कई बार के विधायक या उनके बेटे को भी आजाद समाज पार्टी में लाया जा सकता है वैसे भी पूर्व मंत्री श्री चौहान सपा बसपा से अलग थलग है यदि आजाद समाज पार्टी उनपर भी दांव लगाकर बड़ा गेम खेल सकती हालांकि धामपुर से जिला पंचायत सदस्य विवेक सैन आजाद समाज पार्टी के मजबूत उम्मीदवार हैं लेकिन आजाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील चितौड़ की कम संख्या वाली जातियों को चुनाव न लड़ाने की सलाह से विवेक का टिकट ख़तरे में पड़ सकता है और एक मजबूत स्तम्भ को गहरी चोट लग सकती है हालांकि सांसद से विवेक की गहरी नजदिकी मानी जाती है फिर भी राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता इतिहास गवाह है कि कार्यकर्ता हमेशा पार्टियों के साथ निष्ठावान होकर काम करते रहे हैं लेकिन बहुजन राजनीति के ठेकेदार कब अपने नजदीकी कार्यकर्ता को गहरा जख्म दे-दे जख्म देने या लेने वाले भी नहीं जानते।

​तो क्या नूरपुर से प्रत्याशी होंगे आयुष चौहान?

​आयुष चौहान की ज्वाइनिंग के साथ ही यह कयास तेजी से लगाए जा रहे हैं कि आज़ाद समाज पार्टी उन्हें नुरपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है। आयुष चौहान क्षेत्र के सर्वसमाज (विशेषकर ठाकुर/क्षत्रिय समाज) में अच्छी पैठ रखते हैं। ऐसे में अगर चंद्रशेखर आज़ाद उन्हें नूरपुर से चुनावी मैदान में उतारते हैं, तो यह सीट एएसपी के लिए बेहद मजबूत साबित हो सकती है।

​पश्चिमी यूपी प्रभारी गौहर इकबाल की 'गैरमौजूदगी' बनी चर्चा का विषय

​इस हाई-प्रोफाइल ज्वाइनिंग के दौरान आज़ाद समाज पार्टी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी गौहर इकबाल की अनुपस्थिति ने सबको चौंका दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच उनकी गैरमौजूदगी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि नूरपुर से आयुष चौहान की दावेदारी मजबूत होती है, तो खुद गौहर इकबाल आगामी चुनाव कहां से लड़ेंगे? क्या पार्टी के भीतर टिकटों और क्षेत्रों को लेकर कोई नई बिसात बिछाई जा रही है?

​'सर्वसमाज' की राजनीति पर चंद्रशेखर आज़ाद का फोकस, क्या बसपा वाले फॉर्मूले से मारेंगे बाजी?

​अब तक चंद्रशेखर आज़ाद की राजनीति को मुख्य रूप से दलित और शोषित समाज के इर्द-गिर्द देखा जाता रहा है, लेकिन आयुष चौहान की ज्वाइनिंग से साफ है कि वे अब सर्वसमाज (सामान्य जातियों) को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

​इतिहास गवाह है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कभी पश्चिमी यूपी में इसी सोशल इंजीनियरिंग के दम पर बड़ी सफलताएं हासिल की थीं। बसपा ने ही आयुष के पिता यशपाल चौहान को मंत्री बनाया था, जबकि अशोक राणा, गाजी शाहनवाज, इकबाल और तसलीम जैसे नेताओं को अलग-अलग सामान्य और अन्य सीटों पर लड़ाकर बाजी मारी थी। आज जब बसपा का वह पुराना किला कमजोर पड़ता दिख रहा है, तो चंद्रशेखर आज़ाद ठीक उसी रणनीति को अपना रहे हैं। वे सामान्य जातियों के मजबूत चेहरों को अपने पाले में लाकर एक नया और अजेय राजनीतिक समीकरण (दलित + मुस्लिम + सर्वसमाज) तैयार कर रहे हैं।

​आज़ाद समाज पार्टी के लिए 'वरदान' साबित होंगे आयुष चौहान!

​राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिजनौर जिले की राजनीति में पूर्व मंत्री यशपाल चौहान के परिवार का अपना एक बड़ा वजूद है। ऐसे में आयुष चौहान का एएसपी में आना पार्टी के लिए किसी 'वरदान' से कम नहीं है। इससे पार्टी को न केवल एक मजबूत स्थानीय चेहरा मिला है, बल्कि सर्वसमाज के बीच एएसपी की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।

​संकल्प के साथ शुरुआत: पार्टी में शामिल होने के बाद आयुष चौहान ने कहा कि वे सामाजिक न्याय, भाईचारे और संविधान की विचारधारा को मजबूत करने के संकल्प के साथ आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) परिवार का हिस्सा बने हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद और सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

​अब देखना यह होगा कि इस नई ज्वाइनिंग के बाद पश्चिमी यूपी, खासकर बिजनौर और नूरपुर की सीटों पर विपक्षी दलों के समीकरण किस तरह बिगड़ते हैं और चंद्रशेखर आज़ाद इस नए 'मास्टरस्ट्रोक' से कितनी बड़ी चुनावी बाजी मारते हैं।

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