लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की आहट के बीच अब जातीय समीकरणों को साधने की बिसात बिछाई जाने लगी है। राजनीति के गलियारों में इस समय सबसे बड़ी चर्चा सैन-सविता (नंदवंशी) समाज को लेकर है। प्रदेश भर में करीब 50 लाख की आबादी और हर विधानसभा सीट पर औसतन 10,000 से अधिक वोटों का प्रभाव रखने वाले इस समाज को अब तक किसी बड़ी राजनीतिक भागीदारी का इंतजार है।
आजादी के बाद से उपेक्षा का दंश
हैरानी की बात यह है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने के बावजूद, आजादी के बाद से इस समाज से न तो कोई बड़ा मंत्री बन सका और न ही पर्याप्त संख्या में विधायक या सांसद। अब समाज की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह पर टिकी हैं।
रामचंद्र प्रधान पर दांव लगा सकती है भाजपा?
चर्चाओं का बाजार गर्म है कि उन्नाव-लखनऊ क्षेत्र से एमएलसी रामचंद्र प्रधान को योगी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। रामचंद्र प्रधान की छवि एक मंझे हुए नेता की है
- छात्र राजनीति से उदय! विश्वविद्यालय की राजनीति से जमीन तैयार करने वाले प्रधान की पकड़ अति पिछड़ी जातियों में काफी मजबूत मानी जाती है।
- अनुभव और धैर्य! बसपा में एमएलसी रहने के बाद, पिछले 12 वर्षों से वे भाजपा के प्रति निष्ठावान रहे हैं।
- कर्पूरी ठाकुर की विरासत! जननायक कर्पूरी ठाकुर के समाज से आने वाले प्रधान को मंत्री बनाकर भाजपा एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में है।
नाराजगी या सम्मान? भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
जानकारों की मानें तो पिछले तीन दिनों से मंत्रिमंडल की संभावित सूची में रामचंद्र प्रधान का नाम प्रमुखता से शामिल है। हालांकि, चर्चा यह भी है कि कुछ बड़े नेता यह तर्क दे रहे हैं कि यह समाज ष्परंपरागतष् रूप से भाजपा का वोटर है, इसलिए किसी अन्य वर्ग को तरजीह दी जाए।
सविता समाज में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि भारी समर्थन के बावजूद उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जो सपा या बसपा के समय मिला था। यदि भाजपा ने इस बार भी अति पिछड़ों को निराश किया, तो इसके परिणाम चुनावी नतीजों पर दिख सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक
अंतिम चरण में मंथन
मंत्रिमंडल में शेष बचे पदों को भरने के लिए विचार-विमर्श अंतिम चरण में है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा सपा-कांग्रेस की तरह केवल वादे करेगी, या रामचंद्र प्रधान को कैबिनेट में शामिल कर सविता समाज को ष्उम्मीद से ज्यादाष् सम्मान देगी।
ब्यूरो रिपोर्ट-लखनऊ
