पीलीभीत। लगातार बढ़ती भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बुधवार को जनपद का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसके बाद प्रशासन ने इसे गंभीर चेतावनी मानते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने नागरिकों से स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां अपनाने का आग्रह किया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक बढ़ सकती है, ऐसे में दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना बेहद जरूरी है। यदि किसी कारण बाहर जाना पड़े तो सिर को गमछा, टोपी या छाते से ढककर ही निकलें। प्रशासन का मानना है कि यह केवल सामान्य सलाह नहीं बल्कि लू से बचाने वाली एक प्रभावी सुरक्षा ढाल है। सिर ढककर चलने से शरीर पर सीधी धूप का असर कम पड़ता है और हीट स्ट्रोक का खतरा घटता है।प्रशासन ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की भी सलाह दी है। अधिकारियों के अनुसार केवल प्यास लगने पर ही नहीं बल्कि नियमित अंतराल पर पानी पीना आवश्यक है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और इलेक्ट्रोलाइट जैसे पेय पदार्थों का सेवन शरीर को राहत पहुंचा सकता है। भीषण गर्मी में पसीने के साथ शरीर से जरूरी मिनरल्स और नमक भी बाहर निकल जाते हैं, जिससे कमजोरी और चक्कर आने की समस्या बढ़ सकती है।डीएम ने कहा कि गर्मी के मौसम में कपड़ों का चयन भी स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने चाहिए, जबकि गहरे रंग और सिंथेटिक कपड़ों से बचना चाहिए। सूती कपड़े शरीर को ठंडक देते हैं और पसीना आसानी से सोख लेते हैं, जिससे गर्मी का असर कम होता है।प्रशासन ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का ध्यान रखने की अपील की है। बच्चों को तेज धूप में खेलने से रोकने, बुजुर्गों को दोपहर में बाहर न निकलने देने और बीमार व्यक्तियों को ठंडी जगह पर आराम देने की सलाह दी गई है। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर, सिरदर्द, उल्टी, बेचैनी या अत्यधिक थकान जैसी परेशानी महसूस हो तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने को कहा गया है।
जिलाधिकारी ने मानवीय संवेदनाओं का संदेश देते हुए पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुकी है। लोगों से अपने घरों, मोहल्लों और छतों पर पानी से भरे बर्तन रखने को कहा गया है ताकि गाय, कुत्ते, कबूतर, गौरैया और अन्य पक्षियों को राहत मिल सके। प्रशासन ने इसे पर्यावरणीय संतुलन और मानवीय जिम्मेदारी दोनों के लिए जरूरी बताया है।
इसके साथ ही सभी शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और कार्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कर्मचारियों और विद्यार्थियों को लू से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करें। नगर निकायों को सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल और छायादार विश्राम स्थलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे केवल स्वयं ही नहीं बल्कि अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी गर्मी से बचाव के प्रति जागरूक करें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सावधानी ही इस भीषण मौसम में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

