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पीलीभीत: रेडक्रॉस की बैठक बनी रणभूमिरू 22 महीने की चुप्पी पर फूटा गुस्सा! डीएम के सामने सदस्यों ने खोली ‘बंद कमरे’ की राजनीति की परतेंः “मानव सेवा की संस्था या निजी जागीर?” सवालों की आग में झुलसी रेडक्रॉस समिति


पीलीभीत। इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की जिला इकाई की  आयोजित बैठक उस समय भारी हंगामे में तब्दील हो गई, जब वर्षों से दबा सदस्यों का आक्रोश अचानक विस्फोट बनकर सामने आ गया। करीब 22 महीने बाद बुलाई गई इस बैठक में व्यवस्था, पारदर्शिता, निष्क्रियता और कथित मनमानी को लेकर ऐसा बवाल मचा कि सभागार कई बार आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस का अखाड़ा बनता नजर आया।

बैठक में मौजूद सदस्यों ने खुलकर आरोप लगाया कि मानव सेवा और राहत कार्यों के नाम पर चल रही यह प्रतिष्ठित संस्था अब कुछ चुनिंदा लोगों की “निजी जागीर” बनकर रह गई है, जहां आम सदस्यों की भूमिका सिर्फ कागजों तक सीमित कर दी गई है।

बैठक शुरू होते ही माहौल गर्म हो गया। कई सदस्यों ने खड़े होकर सवाल दागने शुरू कर दिए कि आखिर लगभग दो वर्षों तक बैठकों का आयोजन क्यों नहीं किया गया।

वरिष्ठ सदस्य डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री समेत कई लोगों ने बेहद तीखे स्वर में कहा कि रेडक्रॉस जैसी संवेदनशील संस्था को कुछ लोगों ने अपने नियंत्रण में लेकर उसकी मूल भावना को खत्म कर दिया है। उनका कहना था कि हजारों आजीवन सदस्यों को न तो गतिविधियों की जानकारी दी जाती है और न ही किसी निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

सदस्यों ने आरोप लगाया कि आर्थिक लेनदेन, कार्यक्रमों और प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता पूरी तरह गायब है। संस्था के नाम पर क्या गतिविधियां हुईं, किस मद में कितना खर्च हुआ और किन लोगों ने निर्णय लिए ,इसका स्पष्ट विवरण तक उपलब्ध नहीं कराया गया।बैठक में कई बार ऐसा माहौल बना कि सदस्य आमने-सामने आ गए और प्रशासनिक अधिकारियों को बीच-बचाव करना पड़ा।

बैठक में यह मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा कि दशकों पुरानी संस्था के पास आज तक स्थायी कार्यालय भवन तक नहीं है।

सदस्यों ने इसे प्रशासनिक उदासीनता और संगठन की कमजोर कार्यप्रणाली का बड़ा उदाहरण बताया। कई लोगों ने कहा कि जिस संस्था का उद्देश्य आपदा, बीमारी और जरूरतमंदों की सहायता करना हो, वही संस्था खुद अव्यवस्था और निष्क्रियता की शिकार बन चुकी है।

बैठक में मौजूद कई सदस्यों ने मौजूदा व्यवस्था को तत्काल समाप्त कर नई समिति के गठन की मांग कर डाली।

सदस्यों का कहना था कि यदि संस्था को फिर से सक्रिय और जनसेवा के योग्य बनाना है तो निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं और हर स्तर पर जवाबदेही तय हो।

सूत्रों के अनुसार कुछ सदस्य इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो मामला शासन स्तर तक ले जाया जाएगा।

बैठक में बढ़ते विवाद और तीखे विरोध को देखते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कड़ा रुख अपनाया।डीएम ने स्पष्ट कहा कि अब रेडक्रॉस समिति की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि समिति के लगभग पांच हजार आजीवन सदस्यों की सूची का सत्यापन कराया जाए और उसे अपडेट किया जाए।इसके साथ ही तहसील स्तर पर चुनाव कराने और नई जिला स्तरीय समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए गए।जिलाधिकारी ने यह भी साफ कर दिया कि अब रेडक्रॉस समिति का कोई भी कैंप, कार्यक्रम या गतिविधि जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी की जानकारी के बिना आयोजित नहीं होगी।उन्होंने अगली बैठक गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित कर चुनाव प्रक्रिया और संगठन के पुनर्गठन पर विस्तृत चर्चा करने की बात कही।

बैठक में विशाल टॉकीज के सामने मीना बाजार स्थित रेडक्रॉस सोसायटी की कथित भूमि का मुद्दा भी जमकर उठा।

सदस्यों ने भूमि की स्थिति, स्वामित्व और उसके उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। इस पर जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही समिति के संचालन के लिए वैकल्पिक भवन तलाशने को भी कहा गया।

बैठक के दौरान सामने आए रिकॉर्ड ने भी समिति की निष्क्रियता की पोल खोल दी। जानकारी के अनुसार पिछली बैठकें 2 अगस्त 2024 और 4 मार्च 2024 को आयोजित हुई थीं, लेकिन उसके बाद लंबे समय तक कोई बैठक नहीं बुलाई गई।

इसी वजह से सदस्यों में असंतोष लगातार बढ़ता रहा और मंगलवार को वही गुस्सा खुलकर सामने आ गया।

बैठक में सीएमओ डॉ. आलोक कुमार, सीएमएस डॉ. राजेश कुमार, डीआईओएस राजीव कुमार समेत कई अधिकारी और बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद रहे।

अंत में प्रशासन ने पारदर्शी चुनाव, सदस्य सत्यापन और समिति के पुनर्गठन का भरोसा देकर माहौल शांत कराने की कोशिश की, लेकिन जिस तरह पहली ही बैठक में विरोध के स्वर तीखे हुए, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में रेडक्रॉस समिति की अंदरूनी राजनीति और ज्यादा गरमा सकती है।

अब निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि वर्षों से सवालों में घिरी रेडक्रॉस समिति वास्तव में पारदर्शिता और जनसेवा की राह पर लौटती है या फिर यह विवाद आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक एवं प्रशासनिक मुद्दा बनकर उभरता है।

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