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लखनऊ: उत्कर्ष ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा “रेबीज मुक्त भारत 2030” जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया


लखनऊ । शहर में जनस्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्कर्ष ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा दिनांक 04 मई 2026 को पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, गोमती नगर, लखनऊ में “रेबीज मुक्त भारत 2030” विषय पर एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से विद्यार्थियों को कुत्ते के काटने से बचाव के उपायों एवं रेबीज जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि शांति प्रकाश सिंह (राजकीय पशु चिकित्सा अधिकारी) के आगमन के साथ हुआ। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं विद्यालय प्रशासन ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। अपने संबोधन में शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि “रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर उपचार से पूरी तरह रोका जा सकता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण यह आज भी अनेक लोगों की जान ले रही है।उन्होंने विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाया कि रेबीज वायरस मुख्यतः संक्रमित कुत्तों, बंदरों, बिल्लियों आदि के काटने या खरोंचने से फैलता है। यदि समय रहते उचित कदम न उठाए जाएं तो यह बीमारी जानलेवा सिद्ध हो सकती है। इसलिए उन्होंने सभी से अपील की कि वे किसी भी पशु के काटने या खरोंचने की स्थिति को हल्के में न लें।कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले, तो सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम हैकृघाव को तुरंत साफ पानी और साबुन से कम से कम 10-15 मिनट तक धोना। यह प्रक्रिया संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कई लोग घरेलू उपचार या झाड़-फूंक पर विश्वास कर लेते हैं, जो कि अत्यंत खतरनाक है और इससे जान का जोखिम बढ़ जाता है।इस कार्यक्रम का सफल संचालन उत्कर्ष ग्लोबल फाउंडेशन की सक्रिय सदस्य पूनम झा द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में फाउंडेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्था का लक्ष्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं, बल्कि समाज को एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना भी है। उन्होंने कहा कि “हमारा उद्देश्य है कि वर्ष 2030 तक भारत को रेबीज मुक्त बनाया जाए, और इसके लिए समाज के हर वर्ग, विशेषकर बच्चों और युवाओं को जागरूक करना बेहद जरूरी है।कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजीव अग्रवाल, डॉ. प्रियंका , शैलेश कुमार राय, आराधना मैडम सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किताबों के साथ-साथ इस तरह की व्यावहारिक जानकारी बच्चों को जीवन में सुरक्षित रहने के लिए तैयार करती है।विद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया और उत्कर्ष ग्लोबल फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने शपथ ली कि वे स्वयं जागरूक रहेंगे और अपने परिवार एवं समाज के अन्य लोगों को भी रेबीज और डॉग बाइट्स से बचाव के बारे में जागरूक करेंगे।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया। इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।निष्कर्षतः, “रेबीज मुक्त भारत 2030” जैसे अभियान न केवल जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह समाज में जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना को भी विकसित करते हैं। उत्कर्ष ग्लोबल फाउंडेशन का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता बनी रहेगी, ताकि एक स्वस्थ, सुरक्षित और जागरूक भारत का निर्माण किया जा सके।

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