लखनऊ/प्रयागराज। आईजी डिफेंस 4 मई से होने वाले नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 में अपने एडवांस्ड स्वदेशी सिस्टम काल और ज्वाला को प्रदर्शित करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही कंपनी अपने समस्त पोर्टफोलियो को भी पेश करेगी। इस पोर्टफोलियो में मानवरहित हवाई सिस्टम, मानवरहित जमीनी वाहन, स्वार्म टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म और एंटी-ड्रोन समाधान शामिल हैं। उम्मीद है कि यह प्रस्तुति कंपनी के बढ़ते काम की एक झलक देगी, खासकर सटीक हमलों, ऑटोनोमस (स्वायत्त) सिस्टम और काउंटर-यूएएस तकनीक में कंपनी की क्षमता का एक व्यापक प्रदर्शन होगा। यह भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों को भी दर्शाता है।नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 भारत में नई सैन्य तकनीकों को प्रदर्शित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है। यह सशस्त्र बलों, रक्षा च्ैन्े, प्राइवेट कंपनियों और इनोवेशन इकोसिस्टम के लोगों को एक साथ लाता है। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल के वैश्विक संघर्षों ने किफायती, स्केलेबल और मजबूत रक्षा प्रणालियों की जरूरतों को दर्शाया है। उदाहरण के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध में लंबी दूरी के ड्रोन और लोइटरिंग हथियारों तथा काउंटर-ड्रोन तकनीकों के बढ़ते उपयोग ने इन बदलती आवश्यकताओं के महत्व को दर्शाया है।
काल आईजी डिफेंस का लंबी दूरी तक मार करने वाला स्ट्राइक ड्रोन है। इसे ज्यादा दूरी के हमले वाले मिशनों के लिए बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता 1,000 ाउ तक है और यह 3 से 6 घंटे तक उड़ान भर सकता है। यह जीएनएसएस-आधारित नेविगेशन का इस्तेमाल करता है, तय रास्तों पर अपने आप उड़ सकता है, और इसमें लक्ष्य को साधने के लिए कैमरे लगे हैं। इसकी मदद से यह मुश्किल या जोखिम भरी स्थितियों में भी महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर सटीक वार कर पाता है।वहीं ज्वाला एक कम दूरी का रैपिड रिस्पांस मिसाइल सिस्टम है। इसे लक्ष्यों को तेज गति से और सटीकता से भेदने के लिए बनाया गया है। सटीकता को बेहतर बनाने के लिए यह जड़त्वीय (इनरसियल) नेविगेशन के साथ-साथ टर्मिनल प्रिसिजन मार्गदर्शन का उपयोग करता है। इसका लचीला लॉन्च सिस्टम इसे अलग-अलग तरह के इलाकों में आसानी से इस्तेमाल करने की सुविधा देता है।
इन फ्लैगशिप प्लेटफॉर्म के साथ-साथ आईजी डिफेंस एफपीवी स्ट्राइकर का भी प्रदर्शन करेगा। यह एक कम लागत वाला टैक्टिकल प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम है जिसे श्ऑपरेशन सिंदूरश् के दौरान तैनात किया गया था। इसके बाद गाजा लॉजिस्टिक ड्रोन (ळ।श्र। स्वहपेजपबे क्तवदम) को पेश किया जाएगा। इसकी क्षमता 100-200 किलोग्राम है और इसे दूरदराज व ऊँचे पहाड़ी इलाकों में भारी सामान पहुँचाने के मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी इसके अलावा यूजीवी नंदी (न्ळट छ।छक्प् ) को भी पेश करेगी, जो जमीनी लॉजिस्टिक्स और निगरानी के काम में मदद करता है। कंपनी अपनी समग्र क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए अपने एंटी-ड्रोन समाधान भी प्रदर्शित करेगी। ये सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, रेडियो सिग्नल डिटेक्शन और अन्य जवाबी तरीकों का इस्तेमाल करके दुश्मन के ड्रोनों का पता लगा सकते हैं, उन्हें ट्रैक कर सकते हैं और रोक सकते हैं। इन्हें आधुनिक युद्धक्षेत्रों में ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।
बदलती हुई परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता पर आईजी डिफेंस के फाउंडर और सीईओ श्री बोधिसत्व संघप्रिय ने कहा, “आज ऐसी रक्षा क्षमता बनाने की जरूरत तेजी से बढ़ रही है जो आज की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों और भारत में ही विकसित की गई हों। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने का मतलब सिर्फ आयात कम करना ही नहीं है, बल्कि ऐसी प्रणालियाँ तैयार करना भी है जो बेहतर हो सकें, परिस्थितियों के अनुसार ढल सकें और लंबे समय तक चल सकें।
प्रोजेक्ट काल और ज्वाला और अन्य ऑटोनोमस तथा एंटी-ड्रोन सिस्टम के जरिए हमारा लक्ष्य ऐसे समाधान विकसित करना है जो युद्ध के मैदान की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भारत के स्थानीय रक्षा इकोसिस्टम को भी मजबूत बनाएं।”
आईजी डिफेंस के त् - क् के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट रिटायर्ड मेजर जनरल आर सी पाढ़ी ने बताया, “वर्तमान समय में युद्ध का माहौल अब इस बात पर तय करता है कि देश के पास ऐसे कौन से डिफेंस सिस्टम है जो तेजी से उपयोग में लाए जा सकते हैं और जिनका वार सटीक हो सकता है। वैश्विक स्तर पर हम एक ऐसे बदलाव को देख रहे हैं, जिसमें हमला, निगरानी, स्वार्म इंटेलिजेंस और काउंटर ड्रोन उपायों जैसी एकीकृत क्षमताओं का उपयोग हो रहा है। हमारा प्रयास एक ऐसा डिफेंस सिस्टम बनाना है जो युद्धक्षेत्र में हमारी परिचालन क्षमता को और ज्यादा प्रभावी बना सकें।नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 एक महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है, क्योंकि यहां कई रक्षा विशेषज्ञ और संगठन एक साथ आएंगे। आईजी डिफेंस की इस कार्यक्रम में भागीदारी यह दर्शाती है कि भारतीय प्राइवेट कंपनियाँ आधुनिक युद्ध प्रणालियों के विकास और देश की रक्षा तैयारी को बेहतर बनाने में एक बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
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