बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी के लिए एक और टेंशन! टीएमसी की बैठक में नहीं पहुंचे 10 विधायक
May 07, 2026
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आत्ममंथन शुरू हो गया है. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर टीएमसी विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी के 80 में 70 विधायक पहुंचे और 10 विधायक गैर हाजिर रहे.
टीएमसी के 10 विधायकों की गैर-मौजूदगी ने पश्चिम बंगाल की सियासत में नई अटकलों को जन्म दे दिया है. बंगाल चुनाव हारने के बाद टीएमसी ने विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों मोर्चों पर रणनीति तैयार करने के लिए विधायकों की बैठक रखी थी. पार्टी ने बताया कि ये 10 विधायक अलग-अलग कारणों से मीटिंग में नहीं आ सके.
हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधायकों की अनुपस्थिति के कारणों पर स्पष्टीकरण दिया गया. टीएमसी ने कहा कि पार्टी के 10 विधायक अलग-अलग कारणों से मीटिंग में नहीं पहुंचे हैं. पार्टी नेतृत्व की तरफ से कुछ विधायकों को टीएमसी कार्यकर्ताओं की मदद के लिए अपने-अपने क्षेत्र में रहने को कहा गया था, जबकि कुछ मेडिकल इमरजेंसी के कारण गैर हाजिर रहे.
टीएमसी की ओर से कहना है कि कुछ विधायकों को कार्यकर्ताओं की मदद के लिए अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ही रहने के निर्देश दिए गए थे. अन्य विधायक कथित तौर पर मेडिकल इमरजेंसी और निजी कारणों से अनुपस्थित थे. इस तरह से टीएमसी ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की असहमति या मतभेद की अटकलों को कम करने की कोशिश की है.
ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट आवास पर नवनिर्वाचित तृणमूल विधायकों और नेताओं की बैठक में कहा कि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव लूट लिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी मतगणना के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी.
ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी के कुछ अपने ही लोगों ने उन्हें तोड़ा है. एक वरिष्ठ टीएमसी नेता के अनुसार ममता ने बैठक में कहा कि हमारे अपने कुछ लोगों ने हमें नुकसान पहुंचाया है. हम सभी आरोपों की जांच करेंगे. इस मामले की जांच के लिए ममता बनर्जी ने डेरेक ओ'ब्रायन, फिरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य और असीमा पात्रा को शामिल करते हुए एक अनुशासन समिति बनाई है. इसके अलावा अशांति प्रभावित जिलों का दौरा करने के लिए 3 अलग-अलग फैक्ट फाइंडिंग टीमों का गठन किया गया.
