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संग्रामपुरः तबादला नीति पर उठे सवाल! सीएचसी में 10 साल से एक ही कुर्सी पर जमे ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर


संग्रामपुर। स्वास्थ्य महकमे में स्थानांतरण नीति को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, लेकिन अमेठी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संग्रामपुर में नियम बेअसर नजर आ रहे हैं। यहां तैनात ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर पिछले 10 साल से अधिक समय से एक ही कुर्सी पर जमे हुए हैं। प्रशासनिक नियमों के अनुसार शासकीय कर्मचारियों का एक निश्चित समयावधि के बाद स्थानांतरण होना अनिवार्य है, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन संग्रामपुर सीएचसी में तैनात बीएमपी के मामले में यह नियम लागू नहीं हो पा रहा। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों की मानें तो जिले के कई सीएचसी पर ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर 8 से 10 साल से एक ही स्थान पर तैनात हैं, मगर संग्रामपुर का मामला सबसे पुराना है।अस्पताल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वर्तमान बीएमपी की अस्पताल में मजबूत पैठ बन चुकी है। अधीक्षक के बाद दूसरे बड़े अधिकारी के रूप में काम कर रहे बीएमपी के बिना अस्पताल का कोई भी प्रशासनिक कार्य आगे नहीं बढ़ता। स्टाफ से लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन तक में इनकी सीधी दखल है। चर्चा है कि इनकी कुर्सी हिला पाना किसी के लिए आसान नहीं है।स्थानीय लोगों और कुछ कर्मचारियों का कहना है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक तैनाती से कार्यशैली एकाधिकार जैसी हो जाती है। नए लोगों को मौका नहीं मिल पाता और जवाबदेही भी तय करना मुश्किल होता है। शासन की मंशा के अनुरूप रोटेशन पॉलिसी का उद्देश्य ही यही है कि सिस्टम में गतिशीलता बनी रहे। इस संबंध में जब जिले के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ट्रांसफर की प्रक्रिया शासन स्तर से होती है। कई बार विशेष परिस्थितियों में कुछ कर्मचारियों का कार्यकाल बढ़ जाता है। संग्रामपुर सीएचसी के मामले को संज्ञान में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल संग्रामपुर सीएचसी में 10 साल से ज्यादा समय से जमे ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब देखना है कि स्वास्थ्य विभाग की स्थानांतरण नीति यहां कब लागू होती है।

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