पीलीभीतः ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बैसाखी पर्व! रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां, छात्रों ने दिखाई प्रतिभा की शानदार झलक
April 13, 2026
पीलीभीत। ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल, पीलीभीत की दोनों शाखाओं में सोमवार को बैसाखी पर्व बड़े ही धूमधाम, उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर को बैसाखी थीम के अनुरूप आकर्षक एवं रंग-बिरंगी सजावट से सुसज्जित किया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा और हर ओर खुशियों की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया, जिसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला ने सभी का मन मोह लिया। कक्षा 11 की छात्रा सिमरन कौर ने अपने प्रभावशाली नृत्य से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं, वहीं छात्रों के समूह नृत्य ने कार्यक्रम में ऊर्जा और उल्लास भरते हुए चार चांद लगा दिए। नन्हें विद्यार्थियों ने भी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कक्षा द्वितीय की छात्रा जसलीन कौर ने अपनी मधुर कविता से सभी को भावविभोर कर दिया, जबकि कक्षा चतुर्थ के छात्र आदित्य कुमार ने बैसाखी पर्व के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सभी को प्रभावित किया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों की सहभागिता भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। शिक्षक विशाल दुआ ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में बैसाखी के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे खुशहाली और किसानों के परिश्रम का प्रतीक बताया। वहीं शिक्षक कुशाग्र त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत मधुर गीत ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया और उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन कक्षा पांच के छात्र-छात्रा कीरत कौर एवं गुरसेवक सिंह ने आत्मविश्वास और कुशलता के साथ किया, जिससे पूरा आयोजन सुव्यवस्थित और रोचक बना रहा। विद्यालय की प्रधानाचार्या पूजा छाबड़ा ने सभी को बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमें अन्नदाता किसानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव सिखाता है। साथ ही ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों में विभिन्न परंपराओं और संस्कृतियों के प्रति सम्मान विकसित करने में सहायक होते हैं। विद्यालय के प्रबंधक देवेंद्र सिंह छाबड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां हर त्योहार हमें एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के कोरियोग्राफर, संगीत शिक्षक एवं समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का विशेष योगदान रहा। सभी के सामूहिक प्रयास से यह आयोजन न केवल यादगार बना, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।
