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अमेठीः प्राइवेट स्कूल बन चुके है प्राइवेट लिमिटेड कंपनी


  • 50 फीसदी कमीशन का खेलः अभिभावक का हाल बेहाल
  • हर स्कूलो की अपनी स्टेशनरी और ड्रेस दुकाने फिक्स

अमेठी। अंग्रेजी शिक्षा के नाम पर प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों को लूटा जा रहा है। शासन की लाख प्रयास की बावजूद भी जनपद अमेठी की प्राइवेट स्कूल अपनी मनमानी पर उतर आए हैं वह अभिभावकों की जेब पर डाका डालने से नहीं चूक रहे हैं प्राइवेट स्कूलों ने ऐसा मकर जाल फैलाया है कि इस सर का सारा अभियानों का पैसा स्कूल की प्रबंधक की पास ही जाएगा स्कूल प्रबंधन के द्वारा कॉपी किताबें जूता मौज स्टेशनरी सहित समस्त सामग्री निश्चित दुकान पर ही मिलती है और ऊपर से अभिभावकों को कहा जाता है कि उक्त दुकानदार से हमारा कोई लेना-देना नहीं है आप कॉपी और किताबें कहीं से भी खरीद सकते हैं जबकि सच्चाई सब लोग जान रहे हैं अभिभावकों के साथ शिक्षा के नाम पर ठगी जाने से संबंधित मामलों पर राजनीतिक दल लगातार छुट्टी बने रहते हैं जो अपने आप को जनता का सहयोग बताते हैं वह ऐसे लोकगीत की मुद्दों पर कभी भी आगे नहीं आती उनका दिखावटी प्रेम अब जग जाहिर हो चुका है अमेठी में विभिन्न स्कूलों के भ्रमण करने पर पता चला कि री एडमिशन के नाम पर स्कूल प्रबंधकों के द्वारा लाखों करोड़ों रुपए वसूले जा रहे हैं जबकि सुविधा लगभग शून्य जैसी नजर आ रही है कई विद्यालय ऐसे हैं जहां पर स्कूल के वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं है लेकिन वह बच्चों की भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए वाहनों को विद्यालय में लगाए हुए हैं इस समय जनपद के डी ए वी पब्लिक स्कूल एच ए एल में लगभग दर्जनों वाहन मानक के विपरीत चल रहे हैं । जिनका ए आरटीओ ऑफिस के परिवहन कार्यालय में पंजीकरण नहीं है। प्राइवेट वाहनों द्वारा लगातार बच्चों की भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो नया सत्र शुरू होते ही स्कूल की प्रबंधकों की चांदी हो जाती है वह उनके प्रकरण अभिभावकों की जेब से पैसा निकालने में समर्थ हो जाते हैं उन्हें रोकने के लिए प्रशासन द्वारा कार्यवाही सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है यहां तक की जिले में सैकड़ो वैसे विद्यालय हैं जिनका जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर नहीं है शिकायत के बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्यवाही नहीं की जाती है ऐसे में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस से नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बारे में शिक्षक संघ के पदाधिकारी का कहना है कि गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर शासन द्वारा दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए अन्यथा परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का नामांकन कम हो जाएगा।

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