बलिया। गड़वार ब्लाक में विकास योजनाओं की हकीकत उस समय सामने आ गई, जब एडीओ पंचायत कार्यालय के पीछे खुले में फेंके गए दर्जनों शिलापट्ट मिले। कभी सरकारी उपलब्धियों के प्रतीक रहे ये पत्थर अब लापरवाही, अनियमितता और कथित घोटालों की मूक गवाही दे रहे हैं।
गड़वार ब्लॉक स्थित एडीओ पंचायत कार्यालय के पीछे का दृश्य किसी कबाड़खाने से कम नहीं था, जहां विकास योजनाओं के नाम पर लगाए गए शिलापट्ट बेतरतीब तरीके से फेंके हुए मिले। इन शिलापट्टों पर सड़क, नाली, सामुदायिक भवन और पंचायत भवन जैसे विभिन्न कार्यों के शिलान्यास का विवरण दर्ज है, जिनमें मुख्यमंत्री, मंत्री और सांसद समेत कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम अंकित हैं।
सबसे चैंकाने वाली बात यह सामने आई कि कुछ परियोजनाओं में एक ही कार्य के लिए दो-दो शिलापट्ट लगाए जाने के प्रमाण मिले हैं। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और सिर्फ दिखावे के लिए विकास कार्यों को प्रचारित करने की आशंका और गहरी हो गई है।
मौके पर मौजूद शिलापट्टों की हालत भी कई सवाल खड़े करती है। कुछ पूरी तरह टूटे-फूटे हैं, जबकि कुछ अपेक्षाकृत नए नजर आते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि योजनाएं सही तरीके से पूरी हुई थीं, तो इन शिलापट्टों को इस तरह फेंकने की नौबत क्यों आई?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा मामला पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। विभाग जहां एक ओर विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कार्यों के प्रतीकों का इस तरह अपमान होना अंदरूनी अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। बताया जा रहा है कि तत्कालीन बीडीओ (खंड विकास अधिकारी) संतोष कुमार श्रीवास्तव के कार्यकाल में बड़ी संख्या में शिलापट्ट लगाए गए थे, जिनमें से अब कई बेकार हालत में पाए गए हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
