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हुमायूं कबीर को तगड़ा झटका, ओवैसी ने तोड़ा गठबंधन


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है. हुमायूं कबीर के एक कथित वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मचे बवाल के बाद ओवैसी ने यह फैसला लिया है.

AIMIM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'हुमायूं कबीर के खुलासों ने बंगाल के मुसलमानों की असुरक्षा को उजागर किया है. एआईएमआईएम ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं कर सकती, जिससे मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठे. आज से एआईएमआईएम ने कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन वापस ले लिया है. बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब, उपेक्षित और शोषित समुदायों में से एक हैं. दशकों के धर्मनिरपेक्ष शासन के बावजूद उनके लिए कुछ नहीं किया गया है. किसी भी राज्य में चुनाव लड़ने के संबंध में पार्टी की नीति यही है कि हाशिए पर पड़े समुदायों को एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज मिले. हम बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे और आगे किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे.'

हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने पर गुरुवार (9 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद छिड़ गया. वीडियो में वह भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से संबंध होने और विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने के प्रयासों का कथित तौर पर दावा करते नजर आ रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे शेयर किया और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पीएमओ के साथ कबीर की कथित नजदीकी के दावों की ईडी से जांच की मांग की.

वीडियो में, कबीर को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वह बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए 'किसी भी हद तक' जाने को तैयार हैं और वह शुभेंदु अधिकारी सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं. पिछले साल के अंत में तृणमूल से निलंबित किए जाने के कुछ दिनों बाद 'आम जनता उन्नयन पार्टी' की स्थापना करने वाले कबीर के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने पीएमओ से संपर्क किया था और उन्हें भाजपा शासित अन्य राज्यों के नेताओं के साथ तालमेल बिठाने की सलाह दी गई थी.

वीडियो में कथित तौर पर कबीर यह कहते हुए भी नजर आ रहे हैं कि उनकी रणनीति सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से अल्पसंख्यक वोटों को अपने पक्ष में करने के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस तरह के बदलाव से भाजपा को चुनावी रूप से फायदा हो सकता है. उन्होंने कथित तौर पर इस रणनीति को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में लागू करने के लिए करोड़ों रुपये की आवश्यकता का उल्लेख किया है.

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