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मुस्लिम वोटर्स पर आंख बंद करके कैंची क्यों चलाई?! SIR की कैंची से धड़ल्ले से कटे मुस्लिम वोटर्स! बंगाल में यहां टोटल डिलीशन में 95.5% मुसलमान


बिहार में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन यानी SIR सफल होने के बाद कई प्रदेशों में शुरू किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है. सबसे ज्यादा विवाद भी यहीं देखा जा रहा है. सबर इंस्टीट्यूट की हालिया रिपोर्ट की मानें तो यहां नंदीग्राम विधानसभा सीट पर मुसलमान वोटर्स पर आंख बंद करके कैंची चलाई गई और 95% से ज्यादा वोटर्स के नाम काट दिए. सवाल उठ रहे हैं कि SIR के जरिए मुसलमानों को साफ किया जा रहा है, लेकिन सच क्या है? समझते हैं एक्सप्लेनर में...

सवाल 1: नंदीग्राम में क्या हुआ? 95% डिलीटेड वोटर मुसलमान क्यों?
जवाब: नंदीग्राम BJP नेता सुवेंदु अधिकारी की विधानसभा सीट है, जहां 2021 में ममता बनर्जी से उनकी हार-जीत सिर्फ 2,000 वोटों के फासले पर हुई थी. यहां SIR की सप्लीमेंट्री लिस्ट (पहली 7 सूची) में कुल 2,826 नाम हटाए गए. इनमें 2,700 मुसलमान हैं, यानी 95.5%. नंदीग्राम में मुसलमान आबादी सिर्फ 25-26% है, 2021 में कुल 2.57 लाख वोटर्स में करीब 68,000 मुस्लिम वोटर थे.

कोलकाता के रिसर्च ऑर्गनाइजेशन सबर इंस्टीट्यूट ने ECI डेटा का विश्लेषण किया और यह आंकड़ा पेश किया. संस्था के रिसर्चर साबिर अहमद कहते हैं कि मुस्लिम वोटरों के डिलीशन की यह दर चिंताजनक है. यह SIR प्रक्रिया में राजनीतिक एजेंडा दिखाता है, जो एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए मुस्लिम नाम साफ करने का है.

सवाल 2: यह पैटर्न सिर्फ नंदीग्राम में है या पूरे बंगाल में यही हाल है?
जवाब: नंदीग्राम में डिसप्रोपोर्शनेट यानी अनुपात से ज्यादा डिलीशन का केस है, लेकिन पूरे राज्य का डेटा अलग है. ECI के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 90 लाख हटाए गए नामों में 63% (57.47 लाख) हिंदू और 34% (31.1 लाख) मुसलमान हैं. 2011 के सेंसस डेटा के मुताबिक, बंगाल में मुसलमान आबादी 27% है, इसलिए मुसलमानों का डिलीशन उनका शेयर थोड़ा ज्यादा है, लेकिन हिंदुओं की संख्या सबसे ज्यादा है.

मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना जैसे मुस्लिम-बहुल जिलों में डिलीशन ज्यादा हुए. मुर्शिदाबाद में 4.5 लाख, उत्तर 24 परगना में 3.2 लाख. भवानीपुर और बालीगंज जैसी सीटों पर भी जांच में मुसलमान ज्यादा थे. सबर इंस्टीट्यूट ने पहले कोलकाता की 4 सीटों में भी मुस्लिम नामों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ लिस्ट में ज्यादा पाया था.

सवाल 3: तो क्या मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है?
जवाब: सबर इंस्टीट्यूट और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नंदीग्राम जैसे संवेदनशील इलाकों में मुसलमानों पर असर ज्यादा है. कई मुस्लिम इलाकों में गरीब मजदूर, प्रवासी और सीमांत परिवार प्रभावित हुए. TMC चीफ ममता बनर्जी इसे ‘माइनॉरिटी वोटर्स पर अटैक’ और ‘इलेक्टोरल जेनोसाइड’ बता रही हैं.

AJUP के डॉ. मीर हसनत का कहना है कि जांच में मुसलमानों का रेशियो 5:1 था, लेकिन ECI ने दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि 'मास डिलीशन' के आरोप 'झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर और राजनीतिक' हैं. प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक है. नोटिस, दस्तावेज जमा करने का मौका और ज्यूडिशियल ऑफिसर की जांच हुई है.

सवाल 4: तो जिन वोटर्स के नाम कटे, उनके पास कोई रास्ता नहीं?
जवाब: 91 लाख में से 27 लाख वोटर्स के नाम कटे हैं. यह वोटर्स को 19 ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं, लेकिन नॉमिनेशन खत्म होने के बाद फेज-1 के लिए लिस्ट फ्रीज हो चुकी है. 29 अप्रैल से फेज-2 शुरू होगा, तब कुछ राहत मिल सकती है. कई परिवारों में बाप-बेटे अलग-अलग लिस्ट में हैं, यानी एक पर नाम, दूसरे पर नहीं. मुर्शिदाबाद के भगवानगोला में 1 लाख से ज्यादा जांच और 14 हजार डिलीशन होंगे. मालदा के जॉटकबील में आर्मी पेंशनर नूरुल इस्लाम का नाम चला गया, जबकि पासपोर्ट और PPO बुक सबूत थे.

सवाल 5: SIR की आड़ में मुसलमानों का नाम काटने पर राजनीति क्या है?

जवाब: TMC इस SIR को BJP का हथियार बता रही है. इसके खिलाफ पूरे राज्य में जमकर बवाल मचा, यहां तक कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी इसे ‘ब्लैक वोट्स’ हटाने की प्रक्रिया कह रही है, जो लोकतंत्र को मजबूत करेगी. इस मामले में कांग्रेस और अन्य छोटी पार्टियां भी TMC के साथ खड़ी हैं.

चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट साफ करना था, लेकिन नंदीग्राम जैसे इलाकों में 95.5% मुस्लिम डिलीशन ने सवाल खड़े कर दिए.

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