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सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर रोक की वकालत करते हुए SC में ये क्या बोला केंद्र?! -मंदिर जाने से पहले ब्यूटी पार्लर जाते हैं पुरुष भक्त


केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर रोक की वकालत करते हुए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कुछ मंदिरों का जिक्र किया, जहां भक्तों के प्रवेश को अलग-अलग मान्यताएं और आस्थाएं हैं. केंद्र ने कहा कि राजस्थान के पुष्कर में भगवान ब्रह्मा का मंदिर, कन्याकुमारी में भगवती माता का मंदिर, मुजफ्फरपुर का माता मंदिर और असम का कंरूप कामाख्या देवी मंदिर ऐसे ही उदाहरण हैं, जहां पर अलग-अलग मान्यताएं और प्रथाएं हैं. उन्होंने कहा कि एक मंदिर है जहां पर पुरुषों को साड़ी पहनकर, महिलाओं की तरह शृंगार करके मंदिर जाना होता है.

केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ मंदिर हैं, जहां पुरुषों को जाने की इजाजत नहीं है, एक मंदिर में शादीशुदा पुरुष को मंदिर में एंट्री नहीं मिलती है और एक मंदिर ऐसा है, जहां पर मंदिर में जाने के लिए पुरुषों को महिलाओं की तरह शृंगार करना होता है.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की नौ जजों की बेंच के सामने उन्होंने कहा कि केंद्र ने अपने हलफनामे में कुछ मंदिरों का जिक्र किया है, जहां पर पुरुषों का प्रवेश प्रतिबंधित है. उन्होंने कहा कि एक देवी भगवती का मंदिर है, जिसमें पुरुषों को प्रवेश नहीं दिया जाता है, इससे कुछ आस्था और मान्यताएं जुड़ी हैं. उन्होंने कहा कि पुरुष पुजारी को धार्मिक दायित्व के तहत देवी के पैर धोने होते हैं.

एसजी तुषार मेहता ने यह भी बताया कि पुष्कर में ब्रह्मा का मंदिर है, यह ब्रह्मा का इकलौता मंदिर है और यहां पर शादीशुदा पुरुषों को प्रवेश की अनुमति नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसे भी कुछ मंदिर हैं, जहां पर अलग-अलग तरह की प्रथाएं हैं, ऐसा ही केरल का कोत्तांकुलंगारा श्री देवी मंदिर है, जहां पर पुरुषों को प्रवेश करने के लिए महिलाओं की तरह पूरा शृंगार करना होता है. उन्होंने बताया कि इस मंदिर में आने से पहले पुरुष ब्यूटी पार्लर में जाकर तैयार होते हैं और साड़ी पहनते है. सिर्फ पुरुष ही इस मंदिर में जा सकते हैं.

यह आयोजन आस्था का परम प्रदर्शन है, जहां पुरुष भक्त दाढ़ी शेव करते हैं, ब्यूटी पार्लर जाते हैं, मेकअप करते हैं, रंगीन साड़ियां पहनते हैं और देवी का आशीर्वाद लेते हैं. उन्होंने कहा कि इस आयोजन के लिए पुरुष नई साड़ी खरीदते हैं, ब्लाउज सिलवाते हैं और उनकी पत्नियां या घर की महिलाएं उन्हें तैयार करती हैं.

एसजी तुषार मेहता ने 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ऐतराज जताते हुए कहा कि सबरीमाला या दूसरे मंदिरों में पुरुषों या महिलाओं को प्रवेश नहीं देने का मतलब ये नहीं है कि एक वर्ग को दूसरे वर्ग पर तरजीह दी जा रही है या कम आंका जा रहा है. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दे दी थी. यहां 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की उम्मीद नहीं है. 2018 के आदेश को 2019 में पांच जजों की बेंच ने महिलाओं से भेदभाव के मुद्दे को 3:2 के बहुमत से बड़ी बेंच के पास भेज दिया था.

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि पूरी दुनिया में हिंदू धर्म अकेला ऐसा धर्म है, जिसमें पुरुष न सिर्फ देवी की पूजा करते हैं, बल्कि पुरुष देवी मां के पैर छूते हैं और पवित्र मातृय देवियों के भक्त बन जाते हैं. एसजी तुषार मेहता ने केरल के अत्तुकल मंदिर का भी जिक्र किया और कहा कि यहां पर सिर्फ महिलाओं को प्रवेश की अनुमति है और पोंगल के त्योहार पर यहां महिला भक्तों का जमावड़ा लगता है.

उन्होंने कहा कि इसी तरह केरल का चक्कुलथुकावू मंदिर है, जहां पर पुरुष पुजारी देवियों के पैर धोते हैं और 10 दिनों तक व्रत रखते हैं. वहीं, नारी पूजा के समय सिर्फ महिलाओं को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति होती है.

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