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प्रतापगढः विवाह का वादा बना जाल, शिक्षक ने लूटी आबरू और रकम, मुकदमा दर्ज करने से भाग रही है पुलिस


कुंडा/प्रतापगढ़। विश्वास, रिश्ते और कानून,तीनों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला कुंडा तहसील क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ एक  “कलियुगी शिक्षक” पर न केवल शादी का झांसा देकर युवती का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण करने का आरोप है, बल्कि पुलिस पर भी संगीन सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि संज्ञेय अपराध होने के बावजूद हथिगवां थाना पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बजाय समझौते का दबाव बना रही है।

हथिगवां थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती का विवाह नवंबर 2024 में एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक के साथ तय हुआ था। शादी तय होने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और इसी दौरान आरोपी शिक्षक ने विश्वास का फायदा उठाते हुए युवती को पत्नी की तरह अपने साथ घुमाना शुरू कर दिया। इस दौरान शिक्षक ने न केवल युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए, बल्कि उसकी मां से घर बनवाने के नाम पर लगभग 16 लाख रुपये भी ले लिएकृजिसमें एक लाख ऑनलाइन और 15 लाख नगद शामिल हैं।

पीड़िता का आरोप है कि करीब एक साल तक आरोपी शिक्षक शादी का झांसा देकर उसका शोषण करता रहा। शिक्षक ने अपनी बहन के घर पर ले जाकर उसके साथ अप्राकृतिक तरीके से भी सम्बंध बनाएं, जिसमें शिक्षक के बहन और बहनोई की भी संलिप्तता रही है। अब जब उसकी मंशा और हवस पूरी हो गई तो उसने दहेज की मांग बढ़ाकर शादी से साफ इनकार कर दिया और दूसरी युवती से विवाह करने की बात करने लगा। पीड़िता की मां का कहना है कि तहरीर देने के बाद पुलिस ने आरोपी से सांठगांठ कर ली है और आर्थिक लाभ लेकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। युवती जब आप बीती बताने  थाने गई तो थाने में तैनात महिला दरोगा ने उसके साथ न्याय करने के बजाय उसकी इज्जत का ही सौदा कर डाला और पैसा लेकर समझौता करने की सलाह तक दे डाली।

करीब एक महीने से पीड़िता और उसकी मां सबूतों के साथ थाना और अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अभी तक आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा नही दर्ज किया गया है। स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर आक्रोश और चर्चाओं का माहौल गर्म है। चर्चा है कि शिक्षक के रसूख, एवं धन बल के आगे नतमस्तक हुई पुलिस तथ्यों को तोड़ मरोड़कर आरोपी को बचाने में लगी है। देखने पर यह मामला सिर्फ एक युवती के शोषण का नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है? अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में कब तक संज्ञान लेते हैं और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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