पीलीभीत। जनपद के ईदगाह काशीराम कॉलोनी नगर पंचायत पकड़िया नौगवां स्थित श्री बालाजी नीम करोली धाम मंदिर में श्री हनुमान जी महाराज के जन्मोत्सव पर आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव ने पूरे क्षेत्र को आस्था और भक्ति के रंग में रंग दिया है। मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। “जय श्री राम” और “जय हनुमान” के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
कार्यक्रम के प्रथम दिन मंदिर को फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाकर बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया। सभासद महंत सेवक विशाल के नेतृत्व में विशेष दरबार लगाया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बाबा के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। हर मंगलवार की तरह इस दिन भी बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी, जिससे मंदिर परिसर देर रात तक गुलजार रहा।
दूसरे दिन बुधवार को आयोजन को और अधिक भव्य रूप दिया गया। महंत सेवक विशाल ने दरबार और गद्दी आसन को विशेष रूप से सजवाकर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित जन्मोत्सव दरबार में कन्या पूजन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। महंत द्वारा प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भक्तगण भक्ति रस में डूबकर झूमते नजर आए और पूरा परिसर भक्ति संगीत से गूंज उठा।
तीसरे दिन गुरुवार को हनुमान चालीसा पाठ और भव्य आरती के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि अंतिम दिन भी भारी भीड़ जुटने की संभावना है और कार्यक्रम को पूरे उत्साह के साथ संपन्न किया जाएगा। मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाला निशुल्क दरबार अब श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां दूर-दराज से लोग अपनी समस्याओं के समाधान और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पहुंचते हैं। महंत सेवक विशाल के नेतृत्व में संचालित यह दरबार सेवा और समर्पण की मिसाल बनता जा रहा है।
श्री बालाजी नीम करोली धाम का यह दरबार अब जनपद की सीमाओं से निकलकर पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बना चुका है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुरादें अवश्य पूरी होती हैं। यही वजह है कि हर सप्ताह हजारों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
महंत सेवक विशाल ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर जन्मोत्सव कार्यक्रम में भाग लें और हनुमान जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करें। तीन दिवसीय यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना है, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
