संग्रामपुर: भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी की सजाई गई झांकी, विवाह उत्सव का माहौल
April 09, 2026
संग्रामपुर/अमेठी। संग्रामपुर के भवसिंहपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के छाठवे दिन गुरुवार को श्रीमद्भागवत कथा के दशम स्कंध में रुक्मिणी विवाह का सजीव वर्णन कथा वाचक विनीत जी महराज द्वारा किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम , भक्ति और प्रभु की लीला का अनूठा प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा वाचक विनीत जी महराज ने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को मन ही मन पति मान लिया था . लेकिन भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से करना चाहता था माता पार्वती के मंदिर से लौटते समय भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया और विधि - विधान से द्वारिका में विवाह किया।कथा वाचक ने आज के प्रसंग में बताया कि रुक्मिणी के अन्दर मन मे भगवान श्रीकृष्ण से प्रेमाभक्ति हुई और उन्होंने एक ब्राह्मण के माध्यम से कृष्ण को पत्र लिखकर स्वयं को ले जाने का निमंत्रण दिया।और पत्र पर आमंत्रित भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का मंदिर से निकलते ही अपने रथ पर बैठा लिया और बलराम ने शिशुपाल जरासंध और रुक्मी की सेना को रोककर कृष्ण की सहायता की ।आज के प्रसंग को लेकर भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई।पडांल विवाह उत्सव को लेकर खूब सजाया गया। रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा महिलाओं ने वैवाहिक गीत गये।छाठवे दिन की कथा में विवाह उत्सव को लेकर महिला संख्या बहुत अधिक रही पूरा श्रीमद्भागवत कथा आयोजक परिवार अवधेश सिंह, द्वारिका प्रसाद सिंह,अजय सिंह पवन सिंह दीपू सिंह आकाश सिंह समस्त क्षेत्र वासी भगवान के वैवाहिक उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए।

