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ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रंप की शर्तों को मारी ठोकर


इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम कराने के लिए ट्रंप के संदेशवाहक बने पाकिस्तान को तेहरान ने बहुत बड़ा झटका दिया है। ईरान ने ट्रंप की सभी शर्तों और पाकिस्तान की मध्यस्थता को शिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही ईरान ने मिडिल-ईस्ट में इजरायल और अमेरिका पर हमले तेज कर दिए हैं। पिछले 24 घंटे में ईरान ने अमेरिका के एफ-35 और एफ-15 समेत 2 फाइटर जेट, एक ए-10 एयरक्रॉफ्ट और कई मिलिट्री हेलीकॉप्टर को मार गिराया है। इससे अमेरिका को युद्ध में अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। एक तरह से ईरान के दरवाजे पर बेइज्जत होने के बाद पाकिस्तान अब खुद को बेबस महसूस कर रहा है। साथ ही झूठ बोलकर अपनी लाज बचाने में जुटा है।

पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की शाख ईरान द्वारा दुत्कारे जान के बाद मिट्टी में मिलती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान सबसे ज्यादा अब इसलिए भी परेशान है कि वह ट्रंप को आखिर क्या जवाब देगा। क्योंकि अभी तक पाकिस्तान ने ट्रंप को ईरान के साथ युद्ध विराम करवाने का पूरा भरोसा दिया था। मगर पाकिस्तान के एजेंडे को भांपकर ईरान ने उस पर घास डालना बंद कर दिया। इससे मुनीर और शहबाज की बत्ती गुल हो गई है। अब उन्हें ट्रंप और अमेरिका को खुश करने का कोई और उपाय नहीं सूझ रहा है।

कहा जा रहा है कि ट्रंप के संदेश को लेकर पहुंचे पाकिस्तान के सामने ईरान ने समझौता करने से साफ इनकार कर दिया। ईरान ने ट्रंप की शर्तों को भी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करने और पाकिस्तान में बैठक नहीं करने की बात कही। मगर पाकिस्तान इन खबरों के बीच अपनी इज्जत बचाने के लिए दावों को खारिज कर रहा है। पाकिस्तान ने शनिवार को उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की पहल करने वाले पाकिस्तान के शांति प्रस्तावों के प्रारंभिक स्टेज में ही ईरान ने झटका दे दिया। पाक विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने एक बयान में इन मीडिया रिपोर्टों को "बेबुनियाद" और "कल्पना का हिस्सा" बताया।

पाकिस्तान के प्रमुख डॉन अखबार ने भी ईरान-अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में शांति प्रयासों के बाधित होने की खबर रिपोर्ट की थी। डॉन ने एक अज्ञात पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन ईरान की ओर से स्पष्ट संकेत न मिलने के कारण इस महत्वपूर्ण चरण में गति धीमी हो गई है। अधिकारी ने कहा, “यह आश्चर्यजनक है कि नौसेना, वायुसेना और अन्य सैन्य एवं नागरिक बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर विनाश के बावजूद ईरान ने बातचीत के आह्वान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों ने ईरान से बातचीत में शामिल होने की अपील की, लेकिन “तेहरान ने अब तक संवाद में भाग लेने की अपनी तैयारियों का कोई संकेत नहीं दिया है।

डॉन ने यह भी रिपोर्ट किया कि पाकिस्तानी नेतृत्व को इस मामले में तेहरान की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद मुनीर और शहबाज ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची से संपर्क बनाए हुए हैं। अब तक युद्धविराम कराने में असफल रहने के बावजूद पाकिस्तान खुद को इस युद्ध से दूर रखने में सफल रहा है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे।

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