अमेठी। कस्बे के रेलवे स्टेशन के बाहर लगी एक विवादित होर्डिंग ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस होर्डिंग पर लिखे संदेशकृ “आपको क्या चाहिए धुरंधर काम या अखिलेश का ल्यारी राज” को लेकर लोगों के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।होर्डिंग में “ल्यारी” शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसे पाकिस्तान के कराची शहर के उस इलाके से जोड़कर देखा जा रहा है, जो कभी गैंगवार और हिंसा के लिए कुख्यात रहा है। हाल ही में रिलीज फिल्म “धुरंधर” में भी इस इलाके का जिक्र होने से यह शब्द और ज्यादा चर्चा में आ गया है। पोस्टर में एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में कथित रूप से हुई हिंसा और दंगों का उल्लेख किया गया है, जबकि दूसरी ओर मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में अपराधियों और माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को प्रमुखता से दर्शाया गया है। इस होर्डिंग पर “यूथ अगेंस्ट माफिया” नामक संगठन का नाम भी प्रमुखता से अंकित है। साथ ही संगठन के पदाधिकारियोंकृ कार्यकारी अध्यक्ष, महामंत्री और प्रतापगढ़ प्रभारीकृ के नाम व फोटो भी लगाए गए हैं। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की राजनीतिक संदेश वाली होर्डिंग सामने आने से क्षेत्र में सियासी माहौल गर्माता नजर आ रहा है। स्थानीय लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वही विवादित होर्डिंग के बाद मानो अमेठी मे सियासी उबाल उठ गया हो।
सपा मीडिया प्रभारी राजेश मिश्र ने कहा कि जब यह बैनर और पोस्टर लगाए जा रहे थे, तब प्रशासन पूरी तरह मौन रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी भड़काऊ सामग्री लगाने की अनुमति किसने दी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जल्द ही इस होर्डिंग को हटाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो समाजवादी पार्टी सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी
आनन फानन मे सपा ने विरोध जताया और सड़क पर उतरने की चेतावनी भी दी। समाजवादी पार्टी के जिला प्रवक्ता राजेश मिश्र एडवोकेट ने इस होर्डिंग पर कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजेश मिश्र ने कहा कि जब यह बैनर और पोस्टर लगाए जा रहे थे, तब प्रशासन पूरी तरह मौन रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी भड़काऊ सामग्री लगाने की अनुमति किसने दी। उनका आरोप है कि यह सब जानबूझकर कराया जा रहा है, ताकि चुनाव से पहले माहौल को प्रभावित किया जा सके।उन्होंने कहा कि होर्डिंग में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है, जो निंदनीय है।
